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कुछ मणियाँ चमकती नहीं, बुलाती हैं। बाईस साल से ठहरी घड़ी — ११:४७। एक बंद लॉकेट, जिसे खोलने की कोशिश में तीन साल बीत गए। और एक सूखती धरती, जिसे बचाने की आखिरी उम्मीद है — नागमणि। फ़िल्म-कार मैथिली के पास पिता की अधूरी खोज का नक्शा है; खगन के पास ताम्र-पत्र के राज़। जंगल, पहाड़ और पुरानी कसमों के रास्ते से गुजरती यह खोज उन्हें ले जाती है वहाँ, जहाँ नागलोक की सीमा इंसानी दुनिया से टकराती है — और जहाँ मणि की कीमत सोने में नहीं, त्याग में चुकाई जाती है। एक रोमांचक खोज, एक रहस्यमय विरासत — और वह क्षण जब पहली बूँद सूखी धरती पर गिरती है।
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