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डेढ़ सौ साल तक सबने नक्शा उल्टा पढ़ा।
भादों की बाढ़ में सुरसरी नदी उफनी हुई है और बेलापुर गाँव का आधा हिस्सा पानी में है। पंचायत भवन के राहत-शिविर में अनुराग अपने पिता की नाव का चप्पू और एक पुराना अधूरा कम्पास लिए खड़ा है। बढ़ता पानी नदी के पुराने रास्ते को छूता है, जहाँ 1874 में जमींदारी टोला चंदनपुर डूब गया था। रेत के टीलों से मिलती है गोवर्धन हरखू की डायरी, जिसे इतिहास ने चोर लिख दिया था। डायरी के पन्नों में एक नक्शा है। एक ऐसा नक्शा, जिसे डेढ़ सौ साल तक उल्टा पढ़ा गया। बालू ठेकेदार हीरालाल की नज़र भी उसी काले डोल पर है, और पानी ऊपर चढ़ रहा है।
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