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नन्हे कदम "आठवाँ वचन" शृंखला का पाँचवाँ भाग है। सूर्यमुखी सदन में शुभांकर पहली बार बस्ता उठाकर स्कूल चला है, पीछे की बेंच पर बैठा एक बच्चा जिसकी बाँह कभी नहीं उठती। घर में ओम दादू की घड़ी चल रही है और दो साल की मधुरिमा उसके पीछे दरवाज़े तक डगमगाती आती है।
बीस अध्यायों में यह कहानी पढ़ाई, मेहनत, छोटे-बड़े ऑर्डरों और एक परिवार की है, जिसमें नन्हे क़दम आख़िर में बड़ों को राह दिखा देते हैं।
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