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नमक के मैदान में उन्नीस लोग फँसे हैं। पानी बढ़ रहा है। पुराना रास्ता टूट चुका है। उनके पास कुछ डिब्बे, घायल पैर, थके हाथ और घर से आती अधूरी खबरें हैं।
इला जमीन पढ़ सकती है, लेकिन उसका अपना टखना उसे आगे नहीं ले जाता। तारा की बही में मजदूरी के नाम हैं; अब उन्हीं नामों को अगली सुरक्षित जगह तक पहुँचाना है। सकीना को रास्ता भी देखना है और अपनी बच्ची के पास लौटना भी। हर छोटा पड़ाव नया प्रश्न उठाता है: किसे पहले ले जाएँ, क्या साथ बचाएँ, और मदद की आवाज को वास्तविक जमीन से कैसे मिलाएँ?
नमक में बची पगडंडी उन लोगों की कहानी है जिनका साहस हमेशा तेज चलना नहीं। कभी वह रुकने की बात कहना है, कभी अपने हिसाब की चूक स्वीकारना, कभी दूसरे के बच्चे का हाथ सँभालना। बाहर निकलने का रास्ता उन्हें साथ बनाना होगा, बिना किसी नाम को पीछे छोड़कर।
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