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एक सुबह समुद्र के किनारे लता को एक पुरानी बोतल मिलती है। बोतल में एक चिट्ठी है, सवा सौ साल पुरानी, एक बंदी की, जिसने अपने साथियों के नाम एक गुफ़ा में छिपा रखे हैं। चिट्ठी के साथ तीन बेढंगे मोती हैं, और माँ का वह गीत, जो लता ने बचपन में सुना था और कभी समझा नहीं।
पानी के नीचे लता को वह सुनाई देता है जो और किसी को नहीं देता। उसके साथ हैं एक नौसेना अधिकारी, जो अपने भाई की खोई हुई रात का बोझ उठाए हैं, एक वैज्ञानिक, जिसकी माँ मछलियों से बात करती थी, और एक बूढ़ा नाखुदा, जो पानी की तान पहचानता है। पर उनके पीछे एक और नाव भी है, जिसके कप्तान को बैंक के बारे में उनसे ज़्यादा पता है।
तूफ़ान, गुफ़ा, सत्रह नाम और एक जीवित स्मारक। क्या असली धन वह है जो निकाला जाए, या वह जो लौटाया जाए?
नीलशंख का पर्ल बैंक एक रोमांच है, जिसमें ख़ज़ाना असली है और उसकी क़ीमत वह नहीं जो आप सोचते हैं।
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