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ताम्रबंदर की बंद दुकान में लौटने पर इरा तैलंग का सामना मृणाल के निजी बंडल से होता है: आठ पुराने नक्शा-पत्ते, जिनके किनारों पर नाव, पानी और लौटते माल के निशान हैं। एक पीतल की अधूरी पट्टी इरा को खजाने की राह का संकेत लगती है। मगर जिस रास्ते पर उसका पिता भरोसा कर चुका था, वहाँ किसी दूसरे आदमी ने उसकी कीमत चुकायी थी।
अब इरा के सामने धन से पहले एक कठिन सवाल है: क्या वह अधूरी रेखाओं का सच बता सकेगी?
एक नाव-कारीगर, पुरानी पालों की जानकार और अपने लाभ के लिए बेचैन खरीदार के साथ उसकी खोज बदलते पानी और टूटे पुलों तक जाती है। हर पत्ता कुछ बताता है, कोई अकेला पूरा रास्ता नहीं। नौवाँ नक्शा कहाँ है, और उसे पढ़ने के लिए इरा को किस पर भरोसा करना होगा?
एक तटीय खजाने की खोज, जहाँ लकड़ी का भार, कागज की उम्र और लोगों की चुप्पी अपना हिसाब माँगते हैं।
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