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जिसने कभी कोई आवाज़ नहीं सुनी, आज वही सबको एक साथ सुना सकता है।
हैदराबाद का चौबीस साल का सॉफ़्टवेयर-इंजीनियर ईशान राव जन्म से सुन नहीं सकता। 14 अप्रैल की रात के बाद उसकी चुप्पी में एक ऐसी तरंग जागी है, जो सातों स्वरधारियों को एक साथ जोड़ सकती है।
अप्रैल 2043 की रात पास है, नादबिंदु का सवाल अब भी अधूरा है, और जवाब सातों को मिलकर देना है। माँ लक्ष्मी, मंगेतर दिव्या और शादी की तारीख भी उसी रात के आसपास खड़ी है।
जब संसार को जवाब चाहिए, तो सुनने वाला कौन बने, और बोलने वाला कौन?
निषाद: आख़िरी स्वर सप्तस्वर शृंखला की सातवीं और अंतिम पुस्तक है: निकट-भविष्य के भारत में सात स्वरधारियों, उनकी शक्तियों की कीमत और एक अनसुलझे सवाल की कहानी।
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