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एक सुबह मेरक पर्वत अपनी जगह खड़ा है, लेकिन उसकी परछाईं गायब है। पत्थर के भीतर का तनाव सुन सकने वाली तारा उस रहस्य की खोज में निकलती है। नीलक्षार की नीली रोशनी के पीछे छिपी लोगों की नींद और गिरते नगर का भार उसके सामने आता है। साथियों के कौशल और भरोसे के सहारे उसे ऐसे रास्ते चुनने हैं जिनकी कीमत शरीर और रिश्ते दोनों चुकाते हैं।
क्या खोयी परछाईं लौटाते हुए वे उन लोगों के लिए भी एक सुबह बचा पाएँगे, जिनकी नींद अब तक किसी और के हाथ में थी?
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