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भारत की अंतरिक्ष-गति से नौका "वसुधा" पृथ्वी को पीछे छोड़कर चल पड़ी है। उसकी बस्ती घूमते हुए बेलन के भीतर है, और उसका राशन-कण पहले से गिना जा चुका है।
मुख्य जल-अभियंता आराध्या मैत्र अपने छह साल के बेटे के साथ यात्रा शुरू करती है। उसका पति शीत-निद्रा में है। पहले ही महीने में नौका में एक छिपा यात्री मिलता है, ग्यारह साल का लड़का मोहन।
एक अतिरिक्त व्यक्ति का मतलब है किसी और की जगह कटना। क्या परिषद एक बच्चे के लिए अपनी गिनती तोड़ेगी?
प्रस्थान: इक्कीस मई वसुधा-नौका की पहली पुस्तक है: 3.2 किलोमीटर लंबी घूमती नौका, जल-अभियंता आराध्या मैत्र और एक छिपे यात्री की विज्ञान-कथा।
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