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2209 की वसुधा में एक सुबह निहारिका मैत्र को पता चलता है कि हिसाब में एक बच्चे का नाम नहीं है, जबकि वह बच्चा मौजूद है और भूखा है।
नौका की गिनती, पानी का सार्वजनिक हिसाब और लक्ष्य-तट का रास्ता, हर चीज एक सवाल पर आकर रुकती है: जगह कितनी है, और कौन तय करेगा?
जब बीज दीवार पर उगने लगते हैं, तो नियम और इंसान आमने-सामने आ जाते हैं। क्या हिसाब को बदला जा सकता है, बिना किसी को बाहर छोड़े?
बीज-विद्रोह वसुधा-नौका की पाँचवीं पुस्तक है: 2209 की वसुधा में गिनती, राशन और जगह के सवाल पर टकराती एक विज्ञान-कथा।
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