You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
बारह मिनट की बिजली बंदी। एक बंद कमरा। अँधेरे में सुनाई देती एक परिचित आवाज़।
धवलगढ़ के जल-अध्ययन संस्थान में पुराने दस्तावेज़ों की सूची बनाने पहुँची इला राठौर ने छह सप्ताह बाद लौट जाने का सोचा था। पहली ही शाम शोधकर्ता हेमंत कोचर मृत मिलते हैं। लेकिन कुछ मिनट पहले लोगों ने उनकी आवाज़ सुनी थी।
पुलिस वर्तमान हत्या की जाँच करती है। इला के हिस्से में काग़ज़ हैं: पुरानी सिलाई, बदलते क्रम और ऐसे रिकॉर्ड जिनकी कीमत अलग-अलग लोगों के लिए अलग है। उन्हीं पन्नों में उसके पिता का नाम भी है, बीस वर्ष पुराने नुकसान के साथ।
एक कर्मचारी को अपने काम का श्रेय चाहिए। एक बेटे को पिता की कठिन स्मृति के साथ जीना है। प्रभावित परिवारों को सही रिकॉर्ड चाहिए। और किसी को डर है कि एक बची हुई प्रति उसका वर्तमान छीन सकती है।
आवाज़ क्या साबित करती है? बंद दरवाज़ा किसे बाहर रखता है? और सच पाने की इच्छा कब अपनी मनचाही कहानी बन जाती है?
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book बारह मिनट का अँधेरा.