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बिहार में शराबबंदी है। पर सोनटारा गाँव में शराब ठेके पर नहीं, महुआ के पेड़ों के नीचे बिकती है - और 13 अक्टूबर 2019 की रात उसी शराब ने उन्नीस जानें ले लीं।
फूलवती देवी ने उसी रात अपना पति खोया। सुबह उसे मिली एक चिता, एक कागज़ पर लिखा झूठा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, और एक सिस्टम जो मरने वालों से पहले मर चुका था। जब उसके अपने बेटे सूरज पर झूठा आरोप लगा, तब बीड़ी बाँधने वाली एक विधवा ने ठान लिया - हिसाब अब वही लेगी।
अदालत से चुनाव तक, गाँव की चौपाल से पंचायत के सिंहासन तक - यह कहानी है एक आम औरत की असाधारण लड़ाई की, जिसने उन्नीस चिताओं की राख से हिसाब की किताब लिखी।
मौत का ठेका - जहरीली शराब, जाली कागज़ और बिके हुए ठेकेदारों के खिलाफ एक विधवा का संघर्ष, जो अंत में पूरे गाँव की आवाज़ बन जाता है।
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