You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
1948-49 के काल्पनिक कस्बे मेरुकस में कुमुदिनी व्यास कपड़ों की रंगाई जानती है, मगर उसके काम का नाम दुकान पर नहीं है। पति के जाने के बाद शोक, बेटियों की पढ़ाई और घर के खर्च के बीच वह अपनी मेहनत का दाम, अपना समय और थोड़ी जगह चाहती है। रंगों, आँगनों और छोटे समझौतों से गुजरती यह ऐतिहासिक पारिवारिक कथा एक स्त्री के उस सफर को देखती है जिसमें अपने घर से प्रेम करना और अपनी पहचान माँगना साथ चल सकते हैं।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book रंग उतरने से पहले.