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नाव बनाने वाली अवनि को नींद में जल पर एक रेखा दिखती है। जागकर उसका निशान जाँचने पर अगली रात नया मोड़ खुलता है। मगर रास्ता किसी को समझाते ही उसकी अपनी प्रति से वह हिस्सा मिट जाता है।
बंद जलमार्ग के पार लोगों को भंडार तक सुरक्षित पहुँच चाहिए। अकेली अवनि पूरा नक्शा बचाकर नहीं रख सकती, और सपना पानी, मौसम या नाव की सीमा नहीं बदलता।
रास्ता तभी बनेगा जब वह अपने सबसे जरूरी हिस्से दूसरे हाथों में सौंप सके।
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