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हरिनगर में नरेश पाल की जिंदगी हिसाब से चलती है। पेट्रोल पंप का काउंटर, घर की जरूरतें, मृदुला और तारा। फिर एक पुरानी रसीद उसके हाथ आती है, और उस पर दर्ज वक्त एक हत्या की रात से मेल नहीं खाता।
गोदाम के लेखाकार राजीव सेन की हत्या के बाद एक कारोबारी ने अपना बचाव पेश किया है। मगर उस दावे में झूठ है। झूठ पकड़ लेना और हत्या साबित करना अलग बातें हैं। नरेश के पास एक कागज है, पूरा सच नहीं।
अब उसे तय करना है कि अपने परिवार को बचाने के लिए चुप रहे, या उस सवाल के साथ खड़ा हो जाए जिसे पूरा कस्बा टाल रहा है। रात की रसीद एक मामूली आदमी की कहानी है, जिसके लिए सच की कीमत घर तक आती है।
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