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दुर्घटना के बाद अनिका का बायाँ हाथ पहले जैसा नहीं रहा। कभी तीरंदाजी से पहचानी जाने वाली जिंदगी अब दर्द, घर के खर्च और दूसरों की उम्मीदों के बीच अटक गई है।
नींद में एक मैदान उगता है। वहाँ हाथ नहीं दुखता, लेकिन हर निशाना उसके अपने अतीत की कोई बात सामने रख देता है। जागने पर चोट वैसी ही है। बदल सकता है तो उन बातों से मुँह मोड़ने का उसका ढंग।
वापसी हमेशा उसी जगह पहुँचना नहीं होती जहाँ से हम छूटे थे।
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