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श्रीनगर की झील पर बाढ़ की पुरानी याद फिर जाग उठी है।
ज़ेहरा बट श्रीनगर के अस्पताल में रात की ड्यूटी करने वाली नर्स है। उसका परिवार शिकारे वाला है। 2014 की बाढ़ में उसकी माँ पानी में खो गई थी, और तब से पानी उसके लिए घर भी है और घाव भी।
जुलाई की एक रात उसके हाथों में पानी को बर्फ़ बना देने की शक्ति जागती है। पर हर बार उसके शरीर का तापमान गिरता है और भावनाएँ ठंडी पड़ने लगती हैं। पिता ग़ुलाम नबी और छोटे भाई आदिल से वह यह बात छिपाती है।
उधर झील के किनारे एक बाढ़ जैसी छाया लौट रही है, जो पानी सोख भी सकती है और बहा भी सकती है। क्या ज़ेहरा उसे रोक पाएगी, और अपने भीतर की गर्मी बचा पाएगी?
शिशिर: पानी की स्मृति संगम सुपरनेचुरल यूनिवर्स की दूसरी पुस्तक है: डल और नागिन की झीलें, एक नर्स की ठंडी होती शक्ति और पानी में दबी स्मृति की एक विज्ञान-कथा।
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