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जब दुनिया की साँस रुकती है।
रात के ठीक तीन बजकर ग्यारह मिनट पर सिंगापुर के पासिर पंजांग टर्मिनल की हर क्रेन की स्क्रीन काली हो जाती है। फिर उन पर एक सफ़ेद गोला उभरता है। ग्यारह मिनट, ग्यारह सेकंड तक दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से एक अंधा पड़ा रहता है।
यह हमला नहीं था। यह तो बस एक रिहर्सल थी।
विक्रम, अनाया और कबीर के पास गिनती के दिन हैं, एक मरा हुआ इंजीनियर, उसकी बहन, एक अधूरी चाबी और एक ऐसा दुश्मन जो हर सिरे पर उनसे एक चाल आगे है। सिंगापुर की गीली गलियों से हांगकांग के सर्वर-फ़ार्म तक, और फिर वापस उस बंदरगाह तक जहाँ एक जहाज़ अपने आप चल पड़ा है।
और टीम के भीतर कोई ऐसा भी है, जिस पर शक की परछाईं गहरी होती जा रही है।
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