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उत्तराखंड में दवाओं की पेटियाँ लेकर निकला नीरज रावत देखता है कि पुराने नक्शे का रास्ता अब सुरक्षित नहीं है। बचाव समन्वयक तृप्ति नेगी के साथ वह बदलती ढलानों, गलत दस्तखतों और एक रहस्यमय वस्तु के बीच फँसता है। संजीवनी में किसी एक नायक का बल नहीं, सही समय पर रुकने, सच बताने और साथ मिलकर लोगों को लौटाने की जिम्मेदारी दाँव पर है।
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