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सात चकतियाँ। सात शिक्षक। और एक आधी बनी नींव। नौ साल से आर्या और अभय एक ही घर की दो अलग दिशाओं में चलते रहे हैं। दादा की अलमारी से निकला सात बिंदुओं वाला नक्शा उन्हें एक साथ रास्ते पर ले आता है। पहाड़ की शिला, पुरानी बावड़ी, जंगल और नदी के पार, हर पड़ाव पर अतीत की एक नई आवाज उनका इंतजार करती है। पर इस नक्शे के पीछे कोई और भी है। उसे सातवीं चकती चाहिए। क्या दोनों उस जगह पहुँच पाएँगे जहाँ दादा की कहानी अधूरी है?
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