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नयन सोम की कमाई अनिश्चित है। उसके सपने नहीं। उनमें रंग, ध्वनि और अनोखी जगहें इतनी साफ हैं कि एक कंपनी उनके लिए पैसा देने को तैयार है।
पहला सौदा घर की जरूरतें पूरी करता है। अगले सौदे नींद का ढंग बदलने लगते हैं। हर दृश्य की कीमत सोचते-सोचते नयन के लिए अपने लोगों को बिना बाजार की नजर से देखना कठिन होने लगता है।
जब निजी अनुभूति बिक सकती हो, तब अपने पास रखने का अधिकार कितना महँगा पड़ता है?
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