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समुद्र के नीचे, यादों के पार।
दिसंबर 2031। स्मृति-दर्पण का तीसरा क़दम अनाया को वर्ष 2089 की मुंबई तक ले जाता है। पानी के नीचे बसे एक शहर में एक दरवाज़ा है जो किसी जीवित आदमी का नाम नहीं पढ़ता।
तारा देशमुख और नील कौल उस शहर के भीतर अपने प्रेम और उसके बचे हुए समय को सँभाल रहे हैं। काँच के पार समुद्र है। भीतर ऐसे संकेत हैं जिनका सिरा उनके जीवन से बहुत पहले कहीं कट चुका था।
अनाया जानती है कि हर क़दम की एक क़ीमत है। वह मृत्यु को पलट नहीं सकती। लेकिन किसी को बचाने की चाह और किसी को याद रख पाने के बीच कितनी दूरी है? उस शहर में उसे अपने सबसे निजी बंधन की आवाज़ दाँव पर रखनी होगी।
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