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इस बस्ती में आदमी चलता है, पर उसका साया हमेशा साथ नहीं चलता। दीयों की रोशनी और पत्थर की दीवारों के बीच कुछ परछाइयाँ अपने मालिकों से अलग रखी गई हैं। रखवाला कहता है कि बाहर की सड़क को उनसे बचाना ज़रूरी है। वे क्या चाहती हैं, यह पूछना बहुत पहले छूट गया था।
एक रात पर्दे का पल्ला खुलता है। एक साया सड़क की ओर निकल जाता है। सारंग यहाँ दूसरों की उलझन समझने आया था, लेकिन अब उसकी अपनी परछाईं भी उसके कहने पर हाथ नहीं उठाती। डर के पीछे कोई शत्रु है, या कोई बात जिसे उसने कभी सुनना ही नहीं चाहा?
खतरा केवल अँधेरे में नहीं है। वह सही मान लिए गए उत्तरों में भी है। और इस बार रास्ता खोलने से पहले सारंग को सीखना होगा कि अपने ही एक हिस्से को हुक्म दिए बिना कैसे पुकारा जाए।
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