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छात्रवृत्ति पर पढ़ने आया नमन और उसके तीन रूममेट। रात की कैंटीन, उधार की चाय और हाज़िरी बचाने की एक छोटी-सी शरारत।
हँसी के बीच धीरे-धीरे सामने आता है कि हर दोस्त अपने साथ कुछ अनकहा लेकर आया है। यह उन दिनों की कहानी है जब साथ रहने का मतलब समझ में आने लगता है, और एक खाली कुर्सी भी बहुत कुछ कहती है।
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