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कुछ रातें सिर्फ़ अँधेरी नहीं होतीं। वे किसी और समय का दरवाज़ा होती हैं।
हानले की वेधशाला में एक रात आसमान ने जो दिखाया, उसने अनाया माथुर के पिता का अधूरा सवाल फिर ज़िंदा कर दिया। कलाई पर बँधा एक धागा, श्रीनगर की एक पुरानी गली, और कबीर रैना नाम का एक आदमी, जिसकी आँखों में वह नदी थी जिसके बारे में पिता ने लिखा था।
रुद्र सेन को वह चाहिए जो समय के पार रखा है। अनाया को चाहिए अपने पिता का जवाब। कबीर को चाहिए अपने पिता का पता। और धागा सबको एक ही दिशा में खींच रहा है।
क्या एक क़दम इतिहास में रखकर कोई वर्तमान को बचा सकता है? या हर क़दम की क़ीमत उसी से चुकानी पड़ती है, जिसे हम सबसे ज़्यादा प्यार करते हैं?
हानले की रात कालतंतु शृंखला की पहली पुस्तक है: प्रेम, रहस्य और समय की एक कहानी।
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