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गुरप्रीत "गुरी" सिंह ढिल्लों किसान है और ट्रैक्टर-मैकेनिक। 2019 में क़र्ज़ के बोझ से उसके पिता हरनाम ने जान दे दी थी, और उस बरसी की सुबह से गुरी का घर अब भी उसी चुप्पी में जीता है। अगस्त की एक रात उसके हाथों में धरती की ताक़त उतर आती है। पर हर ज़ोर की एक क़ीमत है, और भूखा शरीर उसे चुकाने से इनकार नहीं कर सकता। पत्नी जसलीन और छह साल के बेटे अर्श के सामने वह इस बात को छिपाए रखता है। उधर गाँव-गाँव में खेत सफ़ेद पड़ने लगे हैं। एक छाया हर किसान की भूख और क़र्ज़ को अपना हथियार बना रही है। क्या गुरी अपने पिता की ज़मीन को बचा पाएगा?
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