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प्रेम भाव (काव्य संग्रह) - प्रेम के उस स्वर की यात्रा है, जो शब्दों से नहीं, हृदय की अनुभूति से समझा जाता है।
प्रेम यहाँ कोई क्षणिक भावना नहीं, बल्कि मन का वह विस्तार है, जहाँ "मैं" छोटा होता जाता है और प्रिय का अस्तित्व विशाल होता चला जाता है। चाहत से शुरू होकर प्रेम निष्ठा तक पहुँचता है - जहाँ न कोई शर्त बचती है, न अपेक्षा, न द्वंद्व। केवल एक सीधा, निर्मल और अटूट समर्पण।
कभी यह मृदु स्पर्श की तरह कोमल है, और कभी विरह की पीड़ा में भी मधुर। यदि पाठक के मन में पहले-पहले एक क्षण को भी शांत लहर, पहचान या भितरी स्वर जागी - तो यही इस पुस्तक का उद्देश्य है।
यह पुस्तक उन हृदयों के लिए है जो प्रेम को केवल जीना जानते हैं।
जीवन के दर्पण में झलकता प्रेम, संघर्ष और करुणा का सौंदर्य।
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