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नारी+पुरुष=संसार (पूरक होकर भी लड़ते क्यों?)

पूरक होते हुए भी लड़ते क्यों?
सुमित्रा गुप्ता 'सखी'
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction, Parenting & Families
Language: Hindi
Price: ₹270 + shipping
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Description

नारी + पुरुष = संसार
(पूरक होते हुए भी लड़ते क्यों हैं?)

यह किताब पति-पत्नी के झगड़े की नहीं, हम सबके जीवन की कहानी है। सृष्टि कहती है नारी और पुरुष पूरक हैं, फिर वे प्रतिद्वंद्वी क्यों बन जाते हैं? एक पुरुष जो बाहर की दुनिया से लड़ता है पर घर आकर चुप रहता है, और एक नारी जो घर-बाहर सब संभाल कर भी सुनती है - तुम करती ही क्या हो?
इसी अनकहे दर्द को शब्द देते हैं इस पुस्तक के 23 लेख। अहंकार, चुप्पी, अपेक्षाएँ और जिम्मेदारियों के बोझ में कैसे प्रेम दब जाता है, और उसे कैसे बचाया जाए - यही इस पुस्तक का सार है। यह किसी को सही-गलत नहीं कहती, बस रिश्तों को समझना सिखाती है। यह पुस्तक हमें सम्मान करना सिखाती है - एक-दूसरे का, रिश्तों का, और विशेषकर उस नारी का जिसने युगों-युगों तक अपमान का दंश सहा है। यह पुस्तक याद दिलाती है कि नारी अबला नहीं, सृष्टि की जननी है और यह शाश्वत सत्य है कि जिस घर में नारी को प्रेम और सम्मान मिलता है, उस घर में लक्ष्मी स्वयं निवास करती है। वह घर सदा फलता-फूलता है।
हर घर के लिए, हर दिल के लिए। संसार को सुंदर और मधुरम बनाना है, तो पहले रिश्तों की मर्यादा समझनी होगी, एक-दूसरे की महत्ता समझनी होगी। यही प्रेम है, यही जीवन है।

About the Author

भावों की सरल-सहज सरिता प्रवाहित करती हुई और अपनी संवेदनशील लेखनी से हृदय को स्पर्श करने वाली लेखिका सुमित्रा गुप्ता 'सखी' का जन्म 27 अगस्त 1963 को टूण्डला में हुआ। आपने 1982 में संस्कृत में स्नातकोत्तर किया। वर्ष 2011 से आपकी साहित्यिक यात्रा निरंतर जारी है। आपकी प्रकाशित कृतियाँ हैं - अन्तर्ज्ञान, अन्तर्विचारधारा, भावभीनी झंकार, अन्तर्मन-प्रवाह, आँचल की छाँव और भगवान तो मनमानी करते हैं। आपकी ये सभी पुस्तकें कई साइट्स पर ई-बुक और पेपरबैक दोनों रूप में प्रकाशित हैं। आपने अंग्रेजी और मराठी पाठकों के लिए भी अपनी पुस्तकों का अनुवाद कर ई-बुक और पेपरबैक के रूप में प्रकाशित किया है। संप्रति आप माथुर वैश्य समाज, महाराष्ट्र महिला मंडल प्रमुख के रूप में क्रियाशील हैं। आप सभी पाठकों का स्नेह और आशीर्वाद इसी प्रकार मिलता रहा तो लेखिका की यह लेखनी निरंतर प्रवाहित होती रहेगी।
पाठकों से निवेदन है कि पुस्तकें पढ़कर Review और Rating अवश्य दीजिएगा।

Book Details

Publisher: SUMITRA GUPTA 'SAKHI'
Number of Pages: 215
Dimensions: 5.50"x8.50"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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