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Matheran की वादियों में बसी यह कहानी एक ऐसे सफर की है, जो सिर्फ रास्तों तक सीमित नहीं… बल्कि दिल तक पहुँचती है। यह किताब एक ऐसी लड़की की कहानी है, जिसने 10वीं कक्षा में एक सपना देखा था माथेरान जाने का। लेकिन यह सपना पूरा होने में 18 साल लग गए। जब वह आखिरकार वहाँ पहुँची, तो उसे सिर्फ खूबसूरत नज़ारे ही नहीं मिले बल्कि मिले
• खुद से मिलने के पल
• प्रकृति की शांति
• और कुछ ऐसे मजेदार अनुभव, जो आज भी मुस्कान दे जाते हैं
इस यात्रा-वृत्तांत में आपको मिलेगा—
खूबसूरत viewpoints का अनुभव
हल्के-फुल्के हँसी वाले पल
गहरी सोच और आत्म-चिंतन
और एक सच्चा, दिल से लिखा हुआ सफर
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