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Type: Print Book
Genre: Education & Language
Language: English
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Description

भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं में ‘साधना’ का अर्थ केवल किसी अनुष्ठान को दोहराना नहीं है। इसका व्यापक आशय है—मन, वाणी, व्यवहार और संकल्प को किसी उच्चतर नैतिक तथा आध्यात्मिक लक्ष्य के अनुरूप क्रमशः प्रशिक्षित करना। शाक्त परंपरा में देवी को परम शक्ति के रूप में देखा जाता है और उपासना का उद्देश्य साधक की चेतना को अनुशासित, एकाग्र और उत्तरदायी बनाना माना जाता है। आर्थर एवलॉन ने शाक्त परंपरा के विवेचन में शक्ति को ब्रह्मांडीय सक्रियता और साधक के अंतर्जगत के बीच संबंध स्थापित करने वाली दार्शनिक संकल्पना के रूप में समझाया है (एवलॉन, 1918)। इस दृष्टि से माँ बगलामुखी की साधना का अध्ययन भी केवल चमत्कार, भय या शत्रु-विजय की लोकप्रिय धारणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका अधिक सार्थक पक्ष वाणी के संयम, प्रतिक्रियात्मक व्यवहार पर नियंत्रण, मानसिक स्थिरता और विवेकपूर्ण मौन के अभ्यास में दिखाई देता है।

About the Author

स्वामी विवेकानंद नाथ (बारेन्य बोरठाकुर) समकालीन भारत के प्रतिष्ठित तंत्राचार्यों में से एक हैं। वे कौलाचार, शक्तोपासना तथा दशमहाविद्या साधना के प्रख्यात आचार्य हैं और अनेक वर्षों से तंत्र की प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण, अध्ययन तथा प्रचार-प्रसार में समर्पित हैं। उनका जीवन सनातन तांत्रिक ज्ञान को उसके शुद्ध, शास्त्रीय और आध्यात्मिक स्वरूप में समाज के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। उन्होंने विशेष रूप से माँ बगलामुखी साधना, कौलाचार, श्मशान साधना, महाविद्या उपासना, गुरु-दीक्षा परंपरा तथा तांत्रिक दर्शन पर व्यापक अध्ययन एवं साधना की है। उनके प्रवचन, साधना-शिविर और आध्यात्मिक मार्गदर्शन से भारत सहित विश्व के अनेक देशों के साधक लाभान्वित हुए हैं। तंत्र को अंधविश्वास, भय और भ्रांतियों से मुक्त कर उसके वास्तविक आध्यात्मिक एवं दार्शनिक स्वरूप को प्रस्तुत करना उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य है। वे श्री श्री सुदर्शिनी बगलामुखी शक्ति धाम के संस्थापक हैं, जहाँ नियमित रूप से साधना, दीक्षा, यज्ञ, महाविद्या उपासना तथा आध्यात्मिक प्रशिक्षण का आयोजन होता है। उनका मानना है कि तंत्र केवल अनुष्ठानों का विषय नहीं, बल्कि आत्मबोध, चेतना के जागरण और परम सत्य की अनुभूति का विज्ञान है। एक लेखक के रूप में स्वामी विवेकानंद नाथ (बारेन्य बोरठाकुर) सरल, प्रामाणिक और शास्त्रसम्मत शैली में लिखते हैं। उनकी रचनाएँ केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साधकों के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन भी प्रदान करती हैं। वे जटिल तांत्रिक सिद्धांतों को सहज भाषा में प्रस्तुत करते हैं ताकि सामान्य जिज्ञासु से लेकर गंभीर साधक तक सभी उनसे लाभान्वित हो सकें। उनकी पुस्तकों का उद्देश्य पाठकों को तंत्र की वास्तविक परंपरा से परिचित कराना, साधना के प्रति श्रद्धा एवं अनुशासन का भाव उत्पन्न करना तथा सनातन आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण में योगदान देना है। वे मानते हैं कि गुरु-कृपा, साधना, संयम और आत्मसमर्पण ही आध्यात्मिक उत्कर्ष के वास्तविक आधार हैं।

Book Details

ISBN: 9788169407939
Publisher: AgniLeaf
Number of Pages: 142
Dimensions: A5
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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माँ बगलामुखी साधना

माँ बगलामुखी साधना

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