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बाल मंजरी

100 बाल लघु कथाएँ
सुशील शर्मा
Type: Print Book
Genre: Children
Language: Hindi
Price: ₹208 + shipping
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Description

बाल मन की कोमल दुनिया में कहानियों की रंगीन छटा
बालमन संसार का सबसे निर्मल और जिज्ञासु संसार है। उसमें प्रश्न भी होते हैं, कल्पनाएँ भी; कौतूहल भी होता है और सीखने की अद्भुत क्षमता भी। बच्चा अपने आसपास की प्रत्येक घटना को अपनी दृष्टि से देखता है और फिर उसके अर्थ खोजता है। ऐसे में कहानी केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहती, वह बालमन से संवाद करने का एक सहज और प्रभावी माध्यम बन जाती है।
‘बाल मंजरी’ इसी बालमन की कोमल संवेदनाओं, जिज्ञासाओं और कल्पनाओं को केंद्र में रखकर प्रस्तुत किया गया बाल कहानी-संग्रह है। इस संग्रह की कहानियों में बच्चों के लिए रोचक कथानक के साथ जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों और मानवीय मूल्यों को सहज ढंग से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। यहाँ सीख उपदेश बनकर नहीं आती, बल्कि कहानी के घटनाक्रम और पात्रों के व्यवहार के माध्यम से धीरे-धीरे बालमन तक पहुँचती है।
बच्चों को कहानी सुनना और पढ़ना इसलिए प्रिय होता है क्योंकि कहानी उन्हें अपने परिचित संसार से जोड़ती है। कभी कोई पात्र उनके जैसा दिखाई देता है, कभी कोई घटना उनके अनुभव से मिलती-जुलती लगती है और कभी कोई कल्पना उन्हें अपने ही सपनों की दुनिया में ले जाती है। ‘बाल मंजरी’ की कहानियों में इसी आत्मीयता को बनाए रखने का प्रयास किया गया है, ताकि बाल पाठक कहानी पढ़ते हुए केवल पाठक न रहे, बल्कि उसके साथ चलने वाला एक सहभागी बन जाए।
बाल साहित्य की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह सरल हो, किंतु सरलीकृत न हो। बच्चों के लिए लिखते समय भाषा सहज होनी चाहिए, पर विचारों की गरिमा बनी रहनी चाहिए। कहानी रोचक हो, पर उसके भीतर जीवन का कोई अर्थ भी छिपा हो। पात्र जीवंत हों, घटनाएँ स्वाभाविक हों और अंत बालमन में किसी प्रश्न, अनुभूति या सकारात्मक विचार को जन्म दे—इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए इन कहानियों को आकार देने का प्रयास किया गया है।
आज के डिजिटल युग में बच्चों के सामने मनोरंजन के अनेक माध्यम हैं। मोबाइल, वीडियो और विभिन्न डिजिटल सामग्री उनकी दुनिया का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे समय में पुस्तक और कहानी का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि पढ़ना बच्चे को कल्पना करने, ध्यानपूर्वक देखने, भाषा को समझने और अपने भीतर संवाद करने का अवसर देता है। एक अच्छी बाल कहानी बच्चे के हाथ में केवल पुस्तक नहीं देती, बल्कि उसे अपनी कल्पना के पंख भी देती है।
‘बाल मंजरी’ नाम अपने आप में इस पुस्तक की भावना को व्यक्त करता है। जैसे मंजरी में अनेक छोटे-छोटे पुष्प मिलकर एक सुंदर रूप धारण करते हैं, वैसे ही इस संग्रह की कहानियाँ बालमन के विविध रंगों—कल्पना, जिज्ञासा, संवेदना, साहस, करुणा, मित्रता और जीवन-बोध—को एक साथ पिरोने का प्रयास हैं।
मेरा विश्वास है कि बाल साहित्य लिखना केवल बच्चों के लिए लिखना नहीं, बल्कि अपने भीतर के उस निश्छल बच्चे से पुनः मिलना भी है, जो जीवन की भागदौड़ में कहीं पीछे छूट जाता है। यदि ‘बाल मंजरी’ की कोई कहानी किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान ला सके, उसके मन में कोई सुंदर प्रश्न जगा सके, उसे कुछ नया सोचने के लिए प्रेरित कर सके या जीवन के किसी छोटे से मूल्य को सहजता से समझा सके, तो इस पुस्तक का प्रयत्न सार्थक होगा।
इन्हीं आशाओं और आत्मीय भावनाओं के साथ ‘बाल मंजरी’ अपने बाल पाठकों के हाथों में सौंप रहा हूँ।

About the Author

सुशील शर्मा : परिचय
सुशील शर्मा हिंदी साहित्य के बहुविध प्रतिभा-संपन्न रचनाकार, शिक्षाविद् एवं चिंतक हैं। मध्यप्रदेश के गाडरवारा से जुड़े सुशील शर्मा ने कविता, गीत, नवगीत, दोहा, हाइकु, ग़ज़ल, लघुकथा, व्यंग्य, काव्य-नाटिका, उपन्यास, बाल साहित्य तथा वैचारिक आलेख जैसी अनेक विधाओं में निरंतर सृजन किया है। उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति, लोकजीवन, मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक सरोकार, प्रकृति, शिक्षा और समकालीन जीवन के विविध पक्ष अभिव्यक्त होते हैं।
उन्होंने एम.टेक. (एप्लाइड/व्यवहारिक भूगर्भशास्त्र), एम.ए. (अंग्रेजी साहित्य) तथा बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की। उनके साहित्यिक परिचय में डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर से उच्च शिक्षा तथा शिक्षा क्षेत्र में दीर्घ सेवाकाल का उल्लेख मिलता है। उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय, बोहानी में अंग्रेजी शिक्षक के रूप में भी कार्य किया और आगे चलकर शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला, गाडरवारा के प्राचार्य के रूप में सेवाएँ दीं।
साहित्य-सृजन के क्षेत्र में उनकी यात्रा लंबे समय से सक्रिय रही है। उनकी आरंभिक प्रकाशित कृतियों में दरकती संवेदनाएँ, गीत विप्लव, सरोकारों के आईने, मन के मोती, अंतर्ध्वनि, अंतर्नाद, विज्ञान अन्वेषिका, छंद का आनंद, माटी की महक, शब्द समंदर और सुनो समय जैसी पुस्तकें शामिल हैं। बाद के वर्षों में उनकी साहित्यिक यात्रा और विस्तृत हुई तथा 37 पुस्तकें प्रकाशित होने का उल्लेख हाल के परिचय में मिलता है।
उनकी रचनात्मक दृष्टि का मूल केंद्र जन-सामान्य के सरोकारों को स्वर देना और साहित्य के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्ति देना रहा है। उनकी लेखनी में एक ओर भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक चेतना के प्रति गहरा अनुराग दिखाई देता है, तो दूसरी ओर समकालीन समाज की विसंगतियों, बदलते जीवन-मूल्यों और सामान्य मनुष्य की अनुभूतियों के प्रति सजग दृष्टि भी दिखाई देती है।
उनकी साहित्य-साधना को विभिन्न संस्थाओं द्वारा समय-समय पर सम्मानित किया गया है। उपलब्ध साहित्यिक अभिलेखों में साहित्यिक एवं शैक्षिक क्षेत्र से जुड़े अनेक सम्मानों का उल्लेख मिलता है। 2025 में प्रकाशित एक विस्तृत साहित्यिक आलेख में उनके जीवन, शिक्षा और साहित्यिक यात्रा का भी विवरण दिया गया है।
सुशील शर्मा का व्यक्तित्व मूलतः शिक्षा और साहित्य के समन्वय का व्यक्तित्व है—एक ऐसे रचनाकार का, जिसने अध्यापन को कर्मभूमि और साहित्य को अपनी संवेदना की अभिव्यक्ति बनाया। उनकी रचनात्मक यात्रा में अनुभव की परिपक्वता, लोकजीवन की निकटता, भारतीय सांस्कृतिक चेतना और मानवीय सरोकारों का निरंतर विस्तार दिखाई देता है।

Book Details

ISBN: 9789334485776
Publisher: Sushil Sharma
Number of Pages: 138
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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