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"सत्यकृपा उवाच" समकालीन जीवन, मानवीय मूल्यों, सामाजिक चेतना, आध्यात्मिक दृष्टि और आत्मचिंतन को समर्पित प्रेरक दोहों का एक सशक्त संग्रह है।
इस पुस्तक में पारंपरिक दोहा शैली के माध्यम से आधुनिक समाज की चुनौतियों, रिश्तों, नैतिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण, मातृभाषा, नारी सम्मान, कर्तव्य, मानवता और ईश्वर-विश्वास जैसे विषयों को सहज एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक दोहे के साथ उसका सरल तात्पर्य भी दिया गया है, जिससे पाठक उसके गहन संदेश को आसानी से समझ सकें।
यह पुस्तक केवल साहित्य प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी पाठकों के लिए उपयोगी है जो जीवन को सकारात्मक दृष्टि से समझना चाहते हैं और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ना चाहते हैं।
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