You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
क्या किसी सभ्यता की पहचान उसके उत्तरों से होती है, या उसके प्रश्नों से?
यही प्रश्न इस पुस्तक की यात्रा का आरम्भ है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता : भारतीय साहित्य की दृष्टि से भारतीय साहित्य की उस दीर्घ परंपरा का अनुसरण करती है, जिसने प्रश्न को अपराध नहीं, ज्ञान का प्रारम्भ माना; संवाद को दुर्बलता नहीं, सभ्यता का संस्कार समझा; और प्रतिरोध को शोर नहीं, नैतिक उत्तरदायित्व के रूप में देखा।
वेदों से लेकर उपनिषदों, भगवद्गीता, भक्ति साहित्य और आधुनिक भारतीय साहित्य तक की यह यात्रा किसी अंतिम निष्कर्ष तक पहुँचने का दावा नहीं करती। यह पाठक को आमंत्रित करती है कि वह भारतीय साहित्य के महान रचनाकारों के साथ चलकर स्वयं विचार करे, स्वयं प्रश्न करे और स्वयं अपने उत्तर खोजे।
यह पुस्तक किसी विचारधारा का घोषणापत्र नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य को पढ़ने, समझने और उसके साथ संवाद करने का एक विनम्र प्रयास है।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता : भारतीय साहित्य की दृष्टि से.