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रूप जातकी

समय विचार
स्व० नर्सिंग सहाय
Type: Print Book
Genre: Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹100 + shipping
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Description

समय विचार नामक पुस्तक का प्राकथन, दो पुस्त पूर्व काशी वासी पंडित श्याम सुंदर पांडेय द्वारा किया जा चूका है। ग्रन्थ प्रान्यता चित्रगुप्त वंशोद्भव बाबू नर्सिंग सहाय मेरे पितामह (दादा) ही थे। आपके सवर्गीय पिता, मुंशी विश्वेस्वर दयाल जी डुमराव रियासत के दुपटी मैनेजर थे। ग्रन्थ करता विद्याध्यन पश्चात, तैतीस वर्ष तक सरकारी कर विभाग में प्रधान कर्मचारियों में थे। आराम से ही श्री नर्सिंग सहाय जी का झुकाव संस्कृत विद्या के तरफ था। प्राचीन ज्योतिष विद्या के अन्वेषण के प्रति आपका विशिस्ट प्रेम आराम से व्यक्त हो रहा था। इस कार्य में आप को काशीस्य विद्धवमंडली के मुकुट शिरोमणि महामहोपाध्या पंडित अयोध्या नाथ जी शर्मा ने उपयुक्त सहायता दिया। बचपन में "विनय माला" पुस्तक लिखा अपनी आस्तिकता में प्रचलित मातृभाषा के प्रति प्रेम व्यक्त्या किया। नौकरी से पेंसन मिलते ही आपने भाषा पंचांग तथा तिथि पत्रा प्रचलित हिंदी मातृभाषा के चरणकमलों में श्रद्धजली अर्पित किया। तदुपरांत जान सवा के विचार से समय विचार नमक पुस्तक तीन खंडो में पुस्तक लिखना प्रारम्भ किया।

About the Author

स्व० नर्सिंग सहाय - समय विचार नामक पुस्तक का प्राकथन, दो पुस्त पूर्व काशी वासी पंडित श्याम सुंदर पांडेय द्वारा किया जा चूका है। ग्रन्थ प्रान्यता चित्रगुप्त वंशोद्भव बाबू नर्सिंग सहाय मेरे पितामह (दादा) ही थे। आपके सवर्गीय पिता, मुंशी विश्वेस्वर दयाल जी डुमराव रियासत के दुपटी मैनेजर थे। ग्रन्थ करता विद्याध्यन पश्चात, तैतीस वर्ष तक सरकारी कर विभाग में प्रधान कर्मचारियों में थे। आरम्भ से ही श्री नर्सिंग सहाय जी का झुकाव संस्कृत विद्या के तरफ था। प्राचीन ज्योतिष विद्या के अन्वेषण के प्रति आपका विशिस्ट प्रेम आराम से व्यक्त हो रहा था। इस कार्य में आप को काशीस्य विद्धवमंडली के मुकुट शिरोमणि महामहोपाध्या पंडित अयोध्या नाथ जी शर्मा ने उपयुक्त सहायता दिया। बचपन में "विनय माला" पुस्तक लिखा अपनी आस्तिकता में प्रचलित मातृभाषा के प्रति प्रेम व्यक्त्या किया। नौकरी से पेंसन मिलते ही आपने भाषा पंचांग तथा तिथि पत्रा प्रचलित हिंदी मातृभाषा के चरणकमलों में श्रद्धजली अर्पित किया। तदुपरांत जान सवा के विचार से समय विचार नमक पुस्तक तीन खंडो में पुस्तक लिखना प्रारम्भ किया।

समय विचार - मुहर्त खंड, जातक खंड तथा वास्तु खंडो में विभक्त किया मैं पांडेय जी के प्रति आभार और अपनी कृतयग्यता वयक करता हूँ।
- ह्रदय शंकर (प्रकाशक )

Book Details

Publisher: Self-Published
Number of Pages: 16
Dimensions: 8.27"x11.69"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Saddle Stitched)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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