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जिस दिन भगवान मर गया

विश्वास से विवेक तक की यात्रा
Advocate Naval Kishor Soni
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction, Philosophy
Language: Hindi
Price: ₹250 + shipping
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Description

जिस दिन भगवान मर गया (विश्वास से विवेक तक की यात्रा)

क्या भगवान सचमुच मर सकता है ? यह प्रश्न जितना असहज है, उतना ही गहरा भी। “जिस दिन भगवान मर गया” किसी धर्म, आस्था या ईश्वर के अस्तित्व के विरुद्ध लिखी गई कहानी नहीं, बल्कि उस मानसिकता की पड़ताल है जिसमें मनुष्य अपने प्रश्नों, भय, अंधविश्वास और सामाजिक रूढ़ियों के बीच अपने विवेक को खो देता है। यह पुस्तक एक ऐसी वैचारिक यात्रा है, जिसमें विश्वास से प्रश्न तक, प्रश्न से तर्क तक और तर्क से विवेक तक पहुँचने की कोशिश की गई है। इसमें ईश्वर, धर्म, आस्था, समाज, राजनीति, मानवीय संवेदना और नैतिकता जैसे विषयों को एक मानवीय और प्रश्नाकुल दृष्टि से देखा गया है।
जब आस्था मनुष्य को सहारा देती है, तो वह शक्ति बनती है; लेकिन जब वही आस्था प्रश्न पूछने से रोक देती है, भय पैदा करती है या मनुष्य को मनुष्य से बाँटने लगती है, तब एक नया प्रश्न जन्म लेता है—क्या हमें ईश्वर को खोजने से पहले अपने भीतर के मनुष्य को नहीं खोजना चाहिए ?
यह उपन्यास पाठक को किसी निष्कर्ष को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं करता। इसके बजाय वह उसे अपने भीतर झाँकने, सवाल पूछने और स्वयं निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है। “जिस दिन भगवान मर गया” दरअसल भगवान की मृत्यु की कहानी नहीं, बल्कि अंधविश्वास की मृत्यु और विवेक के जन्म की कहानी है। एक ऐसी यात्रा, जहाँ मंज़िल कोई अंतिम जवाब नहीं अपितु प्रश्न पूछने का साहस है।

About the Author

नवल किशोर सोनी एक लेखक, अधिवक्ता और शिक्षा एवं सामाजिक विकास के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं। शिक्षा, समाज और मानवीय मूल्यों के क्षेत्र में लगभग 25 वर्षों के अनुभव ने उन्हें समाज को नजदीक से देखने और उसके बदलते स्वरूप को समझने का अवसर दिया है।
राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर, बी.एड., एम.एस.डब्ल्यू. और एल.एल.बी. की शिक्षा प्राप्त नवल किशोर सोनी ने विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विकास संस्थाओं तथा सरकारी कार्यक्रमों के साथ कार्य किया है। वर्तमान में वे शिक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण, पाठ्यचर्या विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़े कार्यों में योगदान दे रहे हैं।
साहित्य के क्षेत्र में उनकी विशेष रुचि कहानी, उपन्यास और कविता लेखन में है। उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाएँ, शिक्षा, रिश्ते, आस्था और जीवन के गहरे प्रश्न प्रमुखता से उभरते हैं। उनकी कविता-संग्रह ‘निराशाओं के पार’ तथा उपन्यास ‘अरपिता: एक देवदासी’ जैसी कृतियाँ उनके साहित्यिक दृष्टिकोण को अभिव्यक्त करती हैं।
‘जिस दिन भगवान मर गया’ उनके लिए सिर्फ एक उपन्यास नहीं, बल्कि मनुष्य की आस्था, तर्क, विवेक और आत्मबोध के बीच चलने वाली एक वैचारिक यात्रा है। इस कृति के माध्यम से लेखक ने यह प्रश्न उठाने का प्रयास किया है कि जब मनुष्य अपनी मान्यताओं पर प्रश्न करना शुरू करता है, तब उसके भीतर कौन-सी नई दुनिया जन्म लेती है।
नवल किशोर सोनी का लेखन पाठक को किसी निष्कर्ष तक पहुँचाने के बजाय सोचने, प्रश्न करने और स्वयं अपना जवाब खोजने के लिए प्रेरित करता है।

Book Details

ISBN: 9789334526288
Publisher: Naval Kishor Soni
Number of Pages: 192
Dimensions: 6.00"x9.00"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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