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जीवन दृष्टि भाग १ जीवन, मनुष्य और हमारे रोज़मर्रा के अनुभवों को देखने का एक अलग प्रयास है।
हम अपने आसपास की साधारण घटनाओं, रिश्तों, विचारों और भावनाओं को अक्सर बिना रुके देखते हैं। लेकिन जब इन्हीं चीज़ों को थोड़ी दूरी से देखने की कोशिश करते हैं, तो जीवन के कई ऐसे पहलू दिखाई देने लगते हैं जिन्हें हम सामान्यतः अनदेखा कर देते हैं।
यह पुस्तक किसी एक निश्चित उत्तर या जीवन जीने के नियम को प्रस्तुत नहीं करती। इसके बजाय यह पाठक को अपने अनुभवों, सोच और जीवन को स्वयं देखने और समझने के लिए आमंत्रित करती है।
जीवन दृष्टि भाग १ में आत्म-चिंतन, मानवीय व्यवहार, रिश्ते, अकेलापन, खुशी, समय, सोच और जीवन के अर्थ जैसे विषयों पर स्वतंत्र विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
यह पुस्तक उन लोगों के लिए है जो जीवन को केवल जीना नहीं, बल्कि उसे देखना, समझना और प्रश्न करना भी चाहते हैं।
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