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'द कॉर्सीकन ब्रदर्स': रक्त, सम्मान और अनूठे जुड़ाव की कालजयी कहानी
सन् 1844 में महान फ्रांसीसी लेखक अलेक्जैंड्रे डुमास द्वारा रचित 'द कॉर्सीकन ब्रदर्स' (The Corsican Brothers) विश्व साहित्य की एक अनमोल धरोहर है। यह उपन्यास केवल दो भाइयों की कहानी नहीं है, बल्कि यह 19वीं सदी के कॉर्सिका द्वीप की संस्कृति, वहां की न्याय प्रणाली और पारिवारिक सम्मान की गहरी पड़ताल करता है।
इस उपन्यास की मुख्य धुरी 'लूसिएन' और 'लुई' नाम के दो जुड़वां भाई हैं। जन्म से अलग होने और दो बिल्कुल विपरीत परिवेश (एक कॉर्सिका के जंगलों में और दूसरा पेरिस के आधुनिक समाज में) में रहने के बावजूद, दोनों के बीच एक अलौकिक और रहस्यमयी मानसिक जुड़ाव रहता है। एक भाई को होने वाले दर्द का अहसास दूसरा भाई मीलों दूर बैठकर भी कर सकता है। अलेक्जैंड्रे डुमास ने इस मनोवैज्ञानिक और पराभौतिक (metaphysical) तत्व को कहानी में इतनी खूबसूरती से बुना है कि पाठक अंत तक सम्मोहित रहता है।
यह कहानी वेंडेटा (Vendetta) यानी पुश्तैनी खून के बदले खून की प्रथा पर आधारित है, जो उस दौर के कॉर्सीकन समाज का एक कड़वा सच थी। इस हिंदी अनुवाद का मुख्य उद्देश्य भारतीय पाठकों को 19वीं सदी के यूरोपीय समाज के इस रोमांचक और भावुक पहलू से परिचित कराना है। भाषा को सरल और प्रवाहमयी रखा गया है ताकि अलेक्जैंड्रे डुमास के मूल लेखन का रोमांच हिंदी में भी पूरी तरह जीवंत हो सके।
अलेक्जैंड्रे डुमास की यह अमर कृति न केवल यूरोपीय साहित्य का एक मील का पत्थर है, बल्कि इसने अनजाने में भारतीय सिनेमा को एक बेहद कामयाब कहानी दी है। सन् 1972 में आई अभिनेता राजेंद्र कुमार की सुपरहिट हिंदी फिल्म 'गोरा और काला' (Gora Aur Kala) सीधे तौर पर इसी उपन्यास 'The Corsican Brothers' का भारतीय रूपांतरण (Adaptation) थी। फिल्म में दिखाए गए जुड़वां भाइयों के अनोखे शारीरिक और मानसिक जुड़ाव (Psychic Bond) का असली मूल स्रोत यही कालजयी उपन्यास है। जब आप इस किताब को पढ़ेंगे, तो आप महसूस करेंगे कि कैसे 1844 में फ्रांस में लिखी गई एक साहसिक कहानी ने 1970 के दशक में भारतीय सिनेमा के पर्दे पर एक ब्लॉकबस्टर इतिहास रचा था।
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