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"शास्त्र से शस्त्र वाला ब्राह्मण" 80 पन्नों का एक ऐसा वैचारिक दस्तावेज़ है, जो समाज के सबसे पुराने और विवादित प्रश्न—"ब्राह्मण जन्म से होता है या कर्म से?"—की जड़ों तक जाता है। लेखक अमन दीक्षित ने इस किताब में महज़ पौराणिक कथाओं का सहारा नहीं लिया, बल्कि आधुनिक विज्ञान, जेनेटिक्स (DNA) और न्यूरोसाइंस के माध्यम से ब्राह्मणत्व के 'बौद्धिक तेज' को परिभाषित किया है।
यह किताब एक सफर है, जो सरस्वती नदी के तटों पर ऋषियों द्वारा विकसित किए गए 'R1a1' जेनेटिक कोड से शुरू होकर, भगवान परशुराम के न्यायकारी फरसे और आचार्य चाणक्य की तीक्ष्ण कूटनीति तक पहुँचता है। लेखक ने बड़े ही बेबाक अंदाज़ में आधुनिक ब्राह्मण समाज के पतन, मांस-मदिरा के बढ़ते प्रभाव और संस्कारों की लुप्त होती मर्यादाओं पर कड़ा प्रहार किया है।
किताब का मुख्य आकर्षण 'शास्त्र और शस्त्र' का वह अद्भुत सामंजस्य है, जहाँ एक ब्राह्मण केवल पोथी-पत्री तक सीमित न रहकर, धर्म की रक्षा के लिए 'काल' बनने का साहस भी रखता है। अंत में, यह गाथा भगवान कल्कि के भविष्यकालीन अवतार और 'सतयुग' की वापसी की आशा के साथ समाप्त होती है। यह पुस्तक हर उस युवा के लिए एक मार्गदर्शिका है, जो अपनी जड़ों पर गर्व तो करना चाहता है, लेकिन अपने कर्मों की कसौटी पर भी खरा उतरने का संकल्प रखता है। यह केवल एक किताब नहीं, बल्कि अमन दीक्षित के शब्दों में—"सोए हुए ब्राह्मणत्व को जगाने का एक आधुनिक शंखनाद है।"
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