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क्या जिसे हम “भूत”, “आत्मा”, “काला जादू”, “नज़र”, “पुनर्जन्म” या कोई अन्य रहस्यमय घटना कहते हैं, उसके पीछे वास्तव में कोई अलौकिक शक्ति होती है? या फिर इन घटनाओं के पीछे मानव मस्तिष्क, मनोविज्ञान, ऊर्जा और प्रकृति के ऐसे नियम छिपे हैं जिन्हें हम अभी पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं?
“द गोस्ट” इन्हीं सवालों की खोज पर आधारित एक रहस्यमय, वैज्ञानिक और दार्शनिक यात्रा है।
यह पुस्तक सामान्य अर्थों में कोई डरावनी कहानी नहीं है। यह उन घटनाओं और धारणाओं को समझने का प्रयास करती है जिन्हें मनुष्य सदियों से रहस्य, paranormal या अलौकिक शक्तियों से जोड़ता आया है। पुस्तक का दृष्टिकोण केवल किसी घटना को सच या झूठ घोषित करना नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे संभावित कारणों को तर्क, विज्ञान, मनोविज्ञान और मानवीय चेतना के संदर्भ में देखने का है।
पुस्तक में मानव मन और उसके अवचेतन की शक्ति, Psychology, Cognitive Psychology, Neuroscience, Electromagnetism, Quantum Physics, Epigenetics और Holographic Reality जैसे विषयों को रहस्यमय घटनाओं के संदर्भ में समझने का प्रयास किया गया है।
काले जादू जैसी धारणाओं को भी पुस्तक मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखने का प्रयास करती है। इसमें Suggestibility, Nocebo Effect और Psychological Warfare जैसी अवधारणाओं के माध्यम से यह प्रश्न उठाया जाता है कि किसी व्यक्ति का विश्वास, भय और अवचेतन उसके अनुभवों को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है।
इसी प्रकार पुनर्जन्म और पिछले जन्म की स्मृतियों जैसे विषयों को Neuroscience और Cognitive Psychology के संदर्भ में देखा गया है। पुस्तक में Confabulation और False Memory जैसी अवधारणाओं के माध्यम से यह समझने की कोशिश की गई है कि हमारा मस्तिष्क कभी-कभी ऐसी स्मृतियाँ और कहानियाँ भी निर्मित कर सकता है जिन्हें व्यक्ति वास्तविक अनुभव मान सकता है।
पुस्तक ऊर्जा और मानव शरीर के संबंध पर भी विचार करती है। मानव हृदय और मस्तिष्क से उत्पन्न विद्युत-चुंबकीय गतिविधि तथा “ऑरा” जैसी लोकप्रिय अवधारणाओं को इसमें चर्चा का हिस्सा बनाया गया है।
इसके आगे यात्रा ध्वनि, आवृत्तियों और Brainwave Entrainment जैसे विषयों तक पहुँचती है, जहाँ Solfeggio Frequencies, 432 Hz और 528 Hz जैसी अवधारणाओं पर चर्चा की गई है।
लेकिन इस पूरी यात्रा का उद्देश्य केवल रहस्य पैदा करना नहीं है।
“द गोस्ट” का मूल प्रश्न है—सत्य क्या है?
क्या हर असामान्य अनुभव अलौकिक होता है?
क्या हर रहस्यमय घटना को अंधविश्वास कहकर नकार देना उचित है?
मानव मस्तिष्क वास्तविकता को किस सीमा तक प्रभावित करता है?
ऊर्जा, चेतना और पदार्थ के बीच संबंध क्या है?
और क्या ब्रह्मांड के बारे में हमारी वर्तमान समझ वास्तव में पूरी है?
लेखक के अनुसार, इन दोनों अतियों—बिना प्रमाण किसी बात को सच मान लेना और बिना समझे उसे झूठ मान लेना—के बीच एक तीसरा रास्ता है: प्रश्न करने, अध्ययन करने और सत्य को समझने का प्रयास।
“द गोस्ट” इसी खोज की यात्रा है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जिन्हें रहस्य, paranormal phenomena, विज्ञान, मनोविज्ञान, मानव चेतना, दर्शन, ऊर्जा, ब्रह्मांड और अनसुलझे प्रश्नों में रुचि है—और जो केवल डरना नहीं, बल्कि डर के पीछे छिपे संभावित सत्य को समझना चाहते हैं।2
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