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स्मृतियों का चक्रव्यूह केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि इतिहास, रहस्य, प्रेम, षड्यंत्र और सत्य की खोज का अद्भुत संगम है।
वाराणसी की एक प्राचीन हवेली के तहखाने से मिली एक आधी जली हुई डायरी युवा इतिहासकार आर्यमन के जीवन को अप्रत्याशित मोड़ पर ला खड़ा करती है। डायरी के प्रत्येक पन्ने में छिपे संकेत उसे लगभग एक सौ तीस वर्ष पुराने ऐसे रहस्य तक ले जाते हैं, जिसे इतिहास ने भुला दिया, पर समय आज भी अपने भीतर संजोए हुए है।
डायरी की पंक्तियाँ उसे देवगढ़ रियासत के उस दौर में पहुँचाती हैं, जहाँ विदुषी नंदिनी और प्रगतिशील युवराज वीरेंद्र सिंह का पवित्र प्रेम सत्ता, षड्यंत्र और सामाजिक रूढ़ियों के बीच अधूरा रह जाता है। एक झूठा राजद्रोह, रहस्यमयी गुमशुदगी, लापता खजाना और समय की परतों में दबा सत्य—इन सबके बीच आर्यमन और उसकी सहयोगी काव्या एक ऐसी खोज पर निकलते हैं, जहाँ हर उत्तर के साथ एक नया प्रश्न जन्म लेता है।
क्या एक जली हुई डायरी इतिहास का सबसे बड़ा रहस्य उजागर कर पाएगी? क्या एक सौ तीस वर्ष पुरानी साज़िश का अंत होगा? और क्या स्मृतियाँ वास्तव में कभी समाप्त होती हैं?
स्मृतियों का चक्रव्यूह इतिहास, जासूसी, रहस्य, रोमांच और मानवीय मूल्यों का ऐसा उपन्यास है, जो पाठक को प्रथम पृष्ठ से अंतिम पृष्ठ तक बाँधे रखता है।
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