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छठ महापर्व: लोक-आस्था से यूनेस्को तक Chhath Mahaparv: Lok-Aastha Se UNESCO Tak

Amikesh Kumar
Type: Print Book
Genre: Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹376 + shipping
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Description

छठ महापर्व : लोक-आस्था से यूनेस्को तक

छठ महापर्व भारतीय लोकजीवन की एक विशिष्ट धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा है, जिसकी जड़ें विशेष रूप से बिहार और मिथिला की सांस्कृतिक विरासत में गहराई तक समाई हुई हैं। सूर्योपासना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को समर्पित यह पर्व आस्था, अनुशासन, पवित्रता, समर्पण और सामाजिक सहभागिता का अनुपम उदाहरण है।

यह पुस्तक छठ महापर्व के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक आयामों को समझने का एक प्रयास है। इसमें पर्व से जुड़ी लोकमान्यताओं, ऐतिहासिक संदर्भों, लोकगीतों, पारंपरिक अनुष्ठानों और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही लोकपरंपराओं पर प्रकाश डाला गया है।

नहाय-खाय और खरना से लेकर संध्या अर्घ्य तथा उषा अर्घ्य तक, छठ महापर्व की प्रत्येक परंपरा अपने भीतर आस्था, आत्मसंयम, प्रकृति-सम्मान और सामुदायिक एकता का संदेश समेटे हुए है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवंत लोकसंस्कृति और सामूहिक सांस्कृतिक स्मृति का भी प्रतीक है।

पुस्तक में छठ महापर्व की विरासत के प्रलेखन, मौखिक परंपराओं के संरक्षण तथा आने वाली पीढ़ियों तक इसके सांस्कृतिक महत्त्व को पहुँचाने की आवश्यकता पर भी विचार किया गया है। साथ ही, यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की अवधारणा के संदर्भ में इस पर्व की परंपराओं और सांस्कृतिक विशेषताओं को समझने का प्रयास किया गया है।

यह कृति भारतीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, बिहार और मिथिला के इतिहास तथा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी है। इसका उद्देश्य छठ महापर्व की समृद्ध परंपरा को समझना, उसका दस्तावेजीकरण करना और उसकी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

लेखक: अमिकेश कुमार

About the Author

अमिकेश कुमार बिहार के सीतामढ़ी जिले के लेखक हैं, जिनकी रुचि भारतीय इतिहास, लोकसंस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन एवं लेखन में है। उनकी लेखकीय दृष्टि अपनी मिट्टी, लोकजीवन और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पहचान को समझने तथा उसे शब्दों के माध्यम से व्यापक पाठक-समाज तक पहुँचाने पर केंद्रित है।

उनकी कृति “छठ महापर्व : लोक-आस्था से यूनेस्को तक” छठ महापर्व की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रलेखन तथा संरक्षण की दिशा में एक प्रयास है। वे भारतीय लोकपरंपराओं के महत्त्व को रेखांकित करते हुए उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के पक्षधर हैं।

Book Details

ISBN: 9789334526783
Number of Pages: 206
Dimensions: A5
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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