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प्रयागराज के पावन संगम तट पर, जहाँ आस्था, इतिहास और अनगिनत जीवन कथाएँ एक साथ बहती हैं, वहीं से शुरू होती है “संगम के उस पार” की कहानी। यह उपन्यास एक साधारण युवक की उस यात्रा का वर्णन है, जो जीवन के संघर्षों, उलझनों और अपने भीतर उठते प्रश्नों के उत्तर खोजते हुए संगम के किनारों तक पहुँचता है। हर मोड़ पर एक नया अनुभव है। हर चेहरे के पीछे एक अनकही कहानी है। और हर पार के आगे... एक नया उस पार। संवेदनशील भाषा, जीवंत वातावरण और मानवीय भावनाओं से सजा यह उपन्यास पाठक को अंत तक बाँधे रखता है।
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