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MAYURPANKH

MAYURPANKH

AMRIT KHARE
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
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Description

" मयूरपंख" में गीतकार अमृत खरे के ४६ चुने हुए हिंदी गीत संग्रहीत हैं | प्रेम , सौंदर्य , रूमानियत और स्वछंदता इनके मूल तत्व हैं | इन गीतों में एक ओर जहाँ सम्मोहन है वहीँ दूसरी तरफ खतरनाक एवं विकल्परहित संघर्ष भी है ! ये गीत जीवन की सांगोपांग व्याख्या करने में समर्थ हैं | ये वह गीत हैं , जो विभिन्न धाराओं में बहे नहीं , नारों में बहके नहीं तथा बनावट से जिनका कोई सरोकार नहीं रहा | ये सहज हैं और इनका अपना एक अलग ही अमृत संसार है -- स्वाभाविक , मधुर ,मार्मिक और लयात्मक ! यही कारण है की ये दशकों से पत्र -पत्रिकाओं ,रेडियो -दूरदर्शन तथा कवि-सम्मेलनों में छाये हुए हैं |
" मयूरपंख" के गीत निस्संदेह पाठकों - श्रोताओं को गुनने -गुनगुनाने को विवश करने में सक्षम हैं !

About the Author

गीतकार अमृत खरे का जन्म सन १९५८ में उत्तर -प्रदेश के बाराबंकी जनपद में हुआ | लखनऊ विश्वविद्यालय से विज्ञान - स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद से वह बैंक ऑफ़ बड़ोदा में सेवारत हैं | साहित्य , विशेषकर कविता में उनकी रूचि बचपन से ही रही है | पहली कविता छठी कक्षा में पढ़ते समय ही प्रकाशित हुई थी | विद्यार्थी जीवन में वह " स्वास्थ्य किरण " ( जुनिओर रेड क्रोस की हस्त लिखित वार्षिक पत्रिका ) , " अर्चना " ( राजकीय इंटर कॉलेज , बाराबंकी की गृह पत्रिका) तथा साहित्यिक -त्रैमासिक "क्षेपक " के प्रकाशन -संपादन से जुड़े रहे | वह दिल्ली-प्रेस की पत्रिकाओं " सरिता " एवं " मुक्ता " के लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र - प्रतिनिधि रहे | अमृत खरे ने टेलीफिल्मों -" बांसुरी " और " मेरा बेटा " तथा दूरदर्शन के धारावाहिक " गाथा -गोपालगंज " के लिए कथा ,पटकथा , संवाद एवं गीत लेखन भी किया | आजकल लेखन के साथ -साथ काव्य -मंचों पर सक्रिय तथा वैदिक -मन्त्रों के गीत -अनुवाद में संलग्न हैं | अमृत खरे साहित्यिक -सेवा के लिए अनेक संस्थाओं से सम्मानित हुए हैं |

Book Details

ISBN: 9789382715498
Number of Pages: 80
Dimensions: 5.5"x8.5"
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

Ratings & Reviews

MAYURPANKH

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1 Customer Review

Showing 1 out of 1
Richa Khare 11 years, 1 month ago

Re: MAYURPANKH

Binding of life and its various shades to words so beautiful yet not wrapped in any unreal covers and deep yet so uncomplicated is an art that is possible through the senses and creativity of only God gifted artists."Mayurpankh" is one such collection of art in the shape of poetry that comes across as a soul nourishing experience for its reader.In today's growing easy approach and rule- free attitude the poet has proved that the words of meaning and depth too can be wrapped in melody and discipline of meter.Those who prefer and try to popularize meter-free poetry in the name of freedom of expression will definitely be bound to think that art is free expression but disciplined art has the charm of divinity and wonder of flawlessness."Mayurpankh" is definitely an amazing and rare work of literature that will come as fresh breath of life for people who have hearts that appreciate and celebrate life and thus,art.

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