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अन्तर्मन की यात्रा

Anand Kumar Ashodhiya
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹281 + shipping
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Description

अन्तर्मन की यात्रा: राष्ट्र-चेतना, सामाजिक यथार्थ और लोक-संवेदना का अमर काव्य-नाद

"साहित्य केवल शब्दों का विलास नहीं, अपितु आत्मा का वह दर्पण है जिसमें कालखंड की धड़कनें, सामाजिक अंतर्द्वंद्व और मनुष्य की आंतरिक अनुभूतियाँ मूर्त रूप लेती हैं।"

‘अन्तर्मन की यात्रा’ स्वतंत्र शोधार्थी, लोक-संस्कृति संरक्षक और कवि आनन्द कुमार आशोधिया ('कवि आनन्द शाहपुर') का वह बहुप्रतीक्षित काव्य-संग्रह है, जो अंतस की मौन संवेदनाओं और बाह्य यथार्थ के जीवंत टकराव से उपजा है। यह कृति जीवन के विविध अनुभवों, सैन्य जीवन के कठोर अनुशासन, सीमाओं पर मातृभूमि के प्रति समर्पण तथा हरियाणा की समृद्ध वाचिक सांग व रागनी परंपरा का एक कालजयी समन्वय है।

पुस्तक के पाँच वैचारिक सोपान:

यह काव्य-संग्रह सुधी पाठकों को पाँच सुगठित वैचारिक पड़ावों से होकर ले जाता है:

1. राष्ट्र-वंदना (National Pride & Valor):
सैन्य जीवन के कड़े अनुशासन और दुर्गम सीमाओं के प्रत्यक्ष अनुभवों से सिंचित ओजस्वी कविताएँ। ‘परमवीर चक्र विजेता निर्मलजीत सिंह सेखों’ और ‘अग्निवीर’ जैसी रचनाओं के माध्यम से भारतीय सशस्त्र सेनाओं के अदम्य पराक्रम और शौर्य का जीवंत शंखनाद।
2. आत्म-बोध और दार्शनिक चिंतन (Philosophical Introspection):
‘वक़्त’ और ‘सवेरा’ जैसी रचनाओं में सांसारिक आपाधापी से परे मनुष्य के आंतरिक अस्तित्व, मौन, काल-चक्र और आत्म-साक्षात्कार का शांत, गंभीर प्रवाह।
3. मानवीय संवेदनाएँ (Human Empathy):
जीवन की कोमल अनुभूतियों, पारिवारिक आत्मीयता, वात्सल्य और संघर्षों के बीच आशा की लौ जलाती मर्मस्पर्शी रचनाएँ।
4. सामाजिक विसंगतियों पर सीधा प्रहार (Social Reality & Critique):
आधुनिक समाज के नैतिक क्षरण के विरुद्ध निर्भीक उद्घोष। ‘सड़क पे जन्मे बच्चे की पुकार’, ‘बचपन’, ‘दहेज’, ‘मंगली’ और ‘रील का मायाजाल’ जैसी कविताएँ कन्या भ्रूण-हत्या, मिलावटख़ोरी, अंधविश्वास और सोशल मीडिया के आभासी भँवर में लुप्त होती मर्यादाओं को बेनकाब करती हैं।
5. लोक-संस्कृति और पिंगल अनुशासन (Folk Heritage & Poetics):
हरियाणा की पावन माटी, सूर्य-कवि पं. लखमीचंद, कवि-शिरोमणि माँगेराम और पूज्य गुरुवर श्री पालेराम दहिया (हलालपुरिया) की परंपरा से अनुप्राणित काव्य-शिल्प। पिंगल शास्त्र के कड़े नियमों—लय, मात्रा, छंद और विशुद्ध तुकांत—की शास्त्रीय शुचिता।

यह पुस्तक क्यों पढ़ें?

• शास्त्रीय अनुशासन और लोक-सुगंध: आज के दौर में जहाँ छंद-मुक्ति के नाम पर शिल्पगत अनुशासनहीनता बढ़ रही है, यह संग्रह पिंगल शास्त्र, छंद-शुचिता और लोक-काव्य की गरिमा को दृढ़ता से पुनर्स्थापित करता है।
• सैनिक की कलम से ओजस्वी स्वर: सीमाओं की वास्तविक धूल और राष्ट्र-रक्षा के सच्चे जज़्बे से उपजी प्रामाणिक देशभक्ति।
• सोए हुए विवेक को झकझोरने वाला साहित्य: यह कविताएँ केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध पाठकों की सामूहिक अंतरात्मा को जगाती हैं।

About the Author

लेखक के बारे में

आनन्द कुमार आशोधिया
कवि • साहित्यिक विश्लेषक • अनुवादक • भाषा-शोधार्थी • लोक-संस्कृति मर्मज्ञ
आनन्द कुमार आशोधिया समकालीन हिन्दी एवं हरियाणवी साहित्य, पिंगल शास्त्र, भाषा-विज्ञान और लोक-संस्कृति के स्वतंत्र शोधार्थी व स्थापित रचनाकार हैं। भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) में 32 वर्षों तक एक 'वारंट अफ़सर' के रूप में विशिष्ट एवं समर्पित सैन्य-सेवा प्रदान करने के उपरांत, उन्होंने स्वयं को पूर्णतः साहित्य-सृजन, भाषाई मानकीकरण, अनुवाद, कोश-निर्माण और क्षेत्रीय वाचिक परंपराओं के संरक्षण हेतु समर्पित कर दिया।
उनका प्रमुख शोध एवं साहित्यिक कार्य हरियाणवी व हिन्दी साहित्य, व्याकरण, लोक-संस्कृति, सांग-शैली और रागनी परंपरा पर केंद्रित है। वे भाषा को केवल संप्रेषण का माध्यम न मानकर सांस्कृतिक स्मृति, ऐतिहासिक चेतना, सामूहिक अनुभव और सामाजिक अस्मिता का सजीव दस्तावेज़ मानते हैं। हरियाणवी संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन हेतु उन्हें 'हरियाणवी संस्कृति गौरव रत्न पुरस्कार' से भी विभूषित किया जा चुका है।
प्रमुख प्रकाशित एवं शोध-कृतियाँ
हरियाणवी साहित्य एवं लोक-परंपरा
• अधराजण (लोक-महाकाव्य)
• थारा मुद्दा थारी बात (काव्य-संग्रह)
• किस्सा भगत पूरणमल (आलोचनात्मक प्रस्तुति)
• हीर-राँझा (हरियाणवी रागनी परंपरा)
• द्रौपदी: एक लोक चेतना (पुनर्व्याख्या)
• अविकावाणी हरियाणवी रागनी संग्रह
हिन्दी एवं वैचारिक साहित्य
• अन्तर्मन की यात्रा (प्रस्तुत काव्य-संग्रह)
• प्रेम के सौ रंग (काव्य-संग्रह)
• सैन समाज का गौरवशाली इतिहास
• अथ मार्जरिका उवाच (लोक-काव्य)
अनुवाद एवं वैश्विक साहित्य
• साकेत (SĀKET) — अंग्रेज़ी काव्यानुवाद (English Transcreation)
• अन्तर्यात्रा (Antaryātrā) — Companion English Edition
• कहाँ-कहाँ पैबंद लगाऊँ
• निस्वार्थी उद्योग पर्व — अंग्रेज़ी अनुवाद
भाषा-वैज्ञानिक एवं कोश-साहित्य (Lexicography)
• हरियाणवी: बोली से भाषा तक का भाषाई सामर्थ्य
• हरियाणवी व्याकरण: मानक एवं प्रामाणिक नियमावली
• हरियाणवी मुहावरे और लोकोक्तियाँ
• हरियाणवी शब्दकोश (हरियाणवी–हिन्दी–अंग्रेज़ी त्रिभाषी कोश)
शोध-कार्य एवं अकादमिक विस्तार
आनन्द कुमार आशोधिया ने हरियाणवी रागनी परंपरा, पिंगल शास्त्र, सांग-शैली, लोक-सौंदर्यशास्त्र और वाचिक परंपराओं पर 16 से अधिक सहकर्मी-समीक्षित (Peer-Reviewed) एवं डीओआई (DOI) अनुक्रमित शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 73 ऐतिहासिक व समकालीन रागनियों के संरक्षण हेतु 'हरियाणवी रागनी स्कॉलर्ली डिजिटल कॉर्पस (HRSDC)' का निर्माण किया है।
• निवास: शाहपुर तुर्क, सोनीपत, हरियाणा (भारत)
• प्रमुख कार्यक्षेत्र: साहित्य • लोक-काव्य • भाषा-विज्ञान • पिंगल शास्त्र • कोश-विज्ञान • अनुवाद • सांस्कृतिक अध्ययन

Book Details

ISBN: 9789334549904
Publisher: Avikavani Publishers
Number of Pages: 117
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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