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धूप के पाँव

Anand Kumar Ashodhiya
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹294 + shipping
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Description

धूप के पाँव: आधुनिक अतुकांत एवं छंदमुक्त हिंदी कविता संग्रह
"कविता जब छंद, मात्रा और तुकांत के पारंपरिक आवरणों को उतारकर नंगे पाँव यथार्थ की खुरदुरी ज़मीन पर चलती है, तब वह शब्दों का शिल्प न रहकर मनुष्य के अस्तित्व का प्रामाणिक दस्तावेज़ बन जाती है।"
‘धूप के पाँव’ स्वतंत्र शोधार्थी, लोक-संस्कृति संरक्षक एवं कवि आनन्द कुमार आशोधिया ('कवि आनन्द शाहपुर') का एक अनूठा और विचारोत्तेजक काव्य-संग्रह है। पिंगल शास्त्र और रागनी परंपरा की शास्त्रीय गेयता के दीर्घकालिक अभ्यास के उपरांत, इस संग्रह में जान-बूझकर छंदमुक्ति का मार्ग चुना गया है। यह 101 आधुनिक अतुकांत कविताओं का एक ऐसा सघन संचयन है जो किसी बाहरी तुकबंदी के स्थान पर विचार की आंतरिक लय, बिंबों की सजीवता और यथार्थवादी संवेदना पर टिका है।
धूप यहाँ केवल रोशनी का पर्याय नहीं, अपितु समय की निरंतर पदचाप है—जो सुबह की गुनगुनी छुअन बनकर उम्मीद जगाती है, दोपहर का अंगार बनकर संघर्ष में तपाती है और ढलती सांझ में एक दार्शनिक एकांत छोड़ जाती है।
संग्रह के प्रमुख वैचारिक आयाम:

प्रकृति और परिंदों का भूगोल: 'तिनके का भूगोल', 'नन्हीं चोंच का विहान', 'डाल का कंपन' और 'परिंदों की संगति' जैसी रचनाएँ कंक्रीट के फैलते जंगलों के बीच सांस लेने की जद्दोजहद और मनुष्य के उजड़ते नैसर्गिक वास का मार्मिक चित्रण करती हैं।
1. कंक्रीट का संत्रास और सामाजिक विसंगतियाँ: 'चौपाल का मौन', 'दूरियों का पुल', 'माँ की थाली', 'पुराना सहारा' और 'वृद्ध आँखों का विश्राम' में आधुनिक जीवन की उस वीरान पीड़ा को स्वर दिया गया है, जिसे भौतिक प्रगति के कोलाहल ने हाशिए पर धकेल दिया है।
2. श्रम, संघर्ष और अस्तित्व की धड़कन: 'खेत में पकता सोना', 'थके मजदूर का संसार', 'पगडंडी का अकेलापन' और 'धूल का बवंडर' आम आदमी के पसीने, संघर्ष और जिजीविषा को बिना किसी बनावट के पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत करते हैं।
3. दार्शनिक अंतर्दर्शन और आत्म-साक्षात्कार: 'दूधिया खामोशी', 'अक्स का सच', 'रेत की प्यास', 'सन्नाटे की नाव' और 'आधी रात की चौंक' जैसी कविताएँ मनुष्य को उसके सामाजिक मुखौटों से मुक्त कर उसके नितांत आंतरिक, मौन एकांत से जोड़ती हैं।

यह संग्रह क्यों पढ़ें?
• अतुकांत की आंतरिक लय: तुकबंदी के बंधनों से परे, यह संग्रह विचार और भाव की विशुद्ध प्रवाहमान लय पर आधारित है।
• सैन्य अनुशासन और लोक-संवेदना का संगम: 32 वर्षों के अनुशासित सैन्य जीवन की परिपक्वता और हरियाणा की माटी की निष्कलुष सच्चाई का एक संतुलित सामंजस्य।
• 101 कविताओं का वैविध्यपूर्ण फलक: प्रकृति, संबंध, अकेलापन, सामाजिक टूटन और आशा—हर रंग की कविता पाठक को अपनी अनुभूतियों के निकट ले जाती है।

About the Author

लेखक के बारे में
आनन्द कुमार आशोधिया
कवि • साहित्यिक विश्लेषक • अनुवादक • भाषा-शोधार्थी • लोक-संस्कृति मर्मज्ञ
आनन्द कुमार आशोधिया समकालीन हिन्दी एवं हरियाणवी साहित्य, पिंगल शास्त्र, भाषा-विज्ञान और उत्तर भारतीय लोक-संस्कृति के स्वतंत्र शोधार्थी व स्थापित रचनाकार हैं। भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) में 32 वर्षों तक एक 'वारंट अफ़सर' के रूप में विशिष्ट एवं अनुशासित सैन्य-सेवा प्रदान करने के उपरांत, उन्होंने स्वयं को पूर्णतः साहित्य-सृजन, भाषाई मानकीकरण, अनुवाद, कोश-निर्माण और वाचिक परंपराओं के दस्तावेजीकरण हेतु समर्पित कर दिया।
उनका प्रमुख साहित्यिक एवं शोध-कार्य हिन्दी व हरियाणवी साहित्य, व्याकरण, लोक-संस्कृति, सांग-शैली और रागनी परंपरा पर केंद्रित है। वे भाषा को केवल संप्रेषण का माध्यम न मानकर सांस्कृतिक स्मृति, ऐतिहासिक चेतना, सामूहिक अनुभव और सामाजिक अस्मिता का सजीव दस्तावेज़ मानते हैं। हरियाणवी संस्कृति एवं लोक-धरोहर के संरक्षण व संवर्धन हेतु उन्हें 'हरियाणवी संस्कृति गौरव रत्न पुरस्कार' से विभूषित किया जा चुका है।
प्रमुख प्रकाशित एवं शोध-कृतियाँ
हिन्दी, पौराणिक एवं वैचारिक साहित्य
• धूप के पाँव (प्रस्तुत समकालीन आधुनिक हिंदी कविता, छंदमुक्त कविताएँ, सामाजिक सरोकार एवं दार्शनिक अंतर्दर्शन)
• भारतीय महाकथाओं का आधुनिक रूपांतरण (वैचारिक एवं विश्लेषणात्मक कृति)
• अन्तर्मन की यात्रा (राष्ट्र-चेतना एवं सामाजिक सरोकारों का काव्य-संग्रह)
• प्रेम के सौ रंग (आधुनिक हिंदी काव्य-संग्रह)
• सैन समाज का गौरवशाली इतिहास (ऐतिहासिक एवं समाजशास्त्रीय शोध)
• अथ मार्जरिका उवाच (प्रतीकात्मक लोक-काव्य)
हरियाणवी साहित्य एवं लोक-परंपरा
• अधराजण (लोक-महाकाव्य)
• थारा मुद्दा थारी बात (समकालीन लोक-काव्य)
• किस्सा भगत पूरणमल (आलोचनात्मक एवं पाठकीय प्रस्तुति)
• हीर-राँझा (हरियाणवी रागनी परंपरा)
• द्रौपदी: एक लोक चेतना (पुनर्व्याख्यात्मक आख्यान)
• अविकावाणी हरियाणवी रागनी संग्रह
अनुवाद एवं वैश्विक साहित्य
• साकेत (SĀKET): मैथिलीशरण गुप्त की अमर कृति का अंग्रेज़ी काव्यानुवाद (English Transcreation)
• अन्तर्यात्रा (Antaryātrā): Companion English Edition
• कहाँ-कहाँ पैबंद लगाऊँ (साहित्यिक रूपांतरण)
• निस्वार्थी उद्योग पर्व: अंग्रेज़ी अनुवाद
भाषा-वैज्ञानिक एवं कोश-साहित्य (Lexicography & Linguistics)
• हरियाणवी: बोली से भाषा तक का भाषाई सामर्थ्य - शोध
• हरियाणवी व्याकरण: मानक एवं प्रामाणिक नियमावली
• हरियाणवी मुहावरे और लोकोक्तियाँ (सांस्कृतिक एवं भाषाई संकलन)
• हरियाणवी शब्दकोश: हरियाणवी–हिन्दी–अंग्रेज़ी त्रिभाषी मानक कोश
शोध-कार्य एवं अकादमिक विस्तार
आनन्द कुमार आशोधिया ने हरियाणवी रागनी परंपरा, पिंगल शास्त्र, सांग-शैली, लोक-सौंदर्यशास्त्र और वाचिक विधाओं पर 16 से अधिक सहकर्मी-समीक्षित (Peer-Reviewed) एवं DOI अनुक्रमित शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ऐतिहासिक व समकालीन रागनियों के संरक्षण हेतु 'हरियाणवी रागनी स्कॉलर्ली डिजिटल कॉर्पस–HARYANVI RAGNI SCHOLARLY DIGITAL CORPUS (HRSDC)' की स्थापना की है।
• निवास: शाहपुर तुर्क, सोनीपत, हरियाणा (भारत)
• प्रमुख कार्यक्षेत्र: साहित्य • लोक-काव्य • भाषा-विज्ञान • पिंगल शास्त्र • कोश-विज्ञान • अनुवाद • सांस्कृतिक अध्ययन

Book Details

ISBN: 9789334575743
Publisher: Avikavani Publishers
Number of Pages: 128
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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