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धूप के पाँव: आधुनिक अतुकांत एवं छंदमुक्त हिंदी कविता संग्रह
"कविता जब छंद, मात्रा और तुकांत के पारंपरिक आवरणों को उतारकर नंगे पाँव यथार्थ की खुरदुरी ज़मीन पर चलती है, तब वह शब्दों का शिल्प न रहकर मनुष्य के अस्तित्व का प्रामाणिक दस्तावेज़ बन जाती है।"
‘धूप के पाँव’ स्वतंत्र शोधार्थी, लोक-संस्कृति संरक्षक एवं कवि आनन्द कुमार आशोधिया ('कवि आनन्द शाहपुर') का एक अनूठा और विचारोत्तेजक काव्य-संग्रह है। पिंगल शास्त्र और रागनी परंपरा की शास्त्रीय गेयता के दीर्घकालिक अभ्यास के उपरांत, इस संग्रह में जान-बूझकर छंदमुक्ति का मार्ग चुना गया है। यह 101 आधुनिक अतुकांत कविताओं का एक ऐसा सघन संचयन है जो किसी बाहरी तुकबंदी के स्थान पर विचार की आंतरिक लय, बिंबों की सजीवता और यथार्थवादी संवेदना पर टिका है।
धूप यहाँ केवल रोशनी का पर्याय नहीं, अपितु समय की निरंतर पदचाप है—जो सुबह की गुनगुनी छुअन बनकर उम्मीद जगाती है, दोपहर का अंगार बनकर संघर्ष में तपाती है और ढलती सांझ में एक दार्शनिक एकांत छोड़ जाती है।
संग्रह के प्रमुख वैचारिक आयाम:
प्रकृति और परिंदों का भूगोल: 'तिनके का भूगोल', 'नन्हीं चोंच का विहान', 'डाल का कंपन' और 'परिंदों की संगति' जैसी रचनाएँ कंक्रीट के फैलते जंगलों के बीच सांस लेने की जद्दोजहद और मनुष्य के उजड़ते नैसर्गिक वास का मार्मिक चित्रण करती हैं।
1. कंक्रीट का संत्रास और सामाजिक विसंगतियाँ: 'चौपाल का मौन', 'दूरियों का पुल', 'माँ की थाली', 'पुराना सहारा' और 'वृद्ध आँखों का विश्राम' में आधुनिक जीवन की उस वीरान पीड़ा को स्वर दिया गया है, जिसे भौतिक प्रगति के कोलाहल ने हाशिए पर धकेल दिया है।
2. श्रम, संघर्ष और अस्तित्व की धड़कन: 'खेत में पकता सोना', 'थके मजदूर का संसार', 'पगडंडी का अकेलापन' और 'धूल का बवंडर' आम आदमी के पसीने, संघर्ष और जिजीविषा को बिना किसी बनावट के पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत करते हैं।
3. दार्शनिक अंतर्दर्शन और आत्म-साक्षात्कार: 'दूधिया खामोशी', 'अक्स का सच', 'रेत की प्यास', 'सन्नाटे की नाव' और 'आधी रात की चौंक' जैसी कविताएँ मनुष्य को उसके सामाजिक मुखौटों से मुक्त कर उसके नितांत आंतरिक, मौन एकांत से जोड़ती हैं।
यह संग्रह क्यों पढ़ें?
• अतुकांत की आंतरिक लय: तुकबंदी के बंधनों से परे, यह संग्रह विचार और भाव की विशुद्ध प्रवाहमान लय पर आधारित है।
• सैन्य अनुशासन और लोक-संवेदना का संगम: 32 वर्षों के अनुशासित सैन्य जीवन की परिपक्वता और हरियाणा की माटी की निष्कलुष सच्चाई का एक संतुलित सामंजस्य।
• 101 कविताओं का वैविध्यपूर्ण फलक: प्रकृति, संबंध, अकेलापन, सामाजिक टूटन और आशा—हर रंग की कविता पाठक को अपनी अनुभूतियों के निकट ले जाती है।
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