You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
कुछ रिश्ते कभी पूरे नहीं होते, फिर भी उम्र भर मन में जीवित रहते हैं।
वैष्णवी ने अर्णव को केवल प्रेम नहीं किया था—उसने उसे अपना संसार मान लिया था। मगर जिस व्यक्ति से वह अपने प्रेम का उत्तर चाहती थी, उसी ने उसे किसी और के नाम कर दिया। टूटे मन के साथ वैष्णवी ने विवाह तो कर लिया, लेकिन उसके भीतर का प्रेम कभी मर नहीं पाया।
समय बीता। रिश्ते बदले। लोग बिछड़े। कुछ मौतें ऐसी आईं जिन्होंने अतीत को फिर से जीवित कर दिया।
छह वर्ष बाद अर्णव जब वैष्णवी के घर लौटता है, तो उसके सामने वही लड़की नहीं होती जिसे उसने कभी जाना था। एक सफेद साड़ी, गोद में एक बच्ची, सूनी आँखें और एक ऐसी खामोशी—जिसमें वर्षों का दर्द दफन था।
और फिर उसे अपने अतीत की कही हुई एक बात याद आती है...
क्या कुछ शब्द केवल क्रोध में कहे जाते हैं, या कभी-कभी वे नियति बनकर लौटते हैं?
‘अवशेष’ प्रेम, विरह, पछतावे, ईर्ष्या, मृत्यु और उन भावनाओं की कहानी है जो इंसान के चले जाने के बाद भी उसके भीतर बची रहती हैं।
क्योंकि कुछ प्रेम समाप्त नहीं होते...
वे बस अवशेष बनकर रह जाते हैं।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book अवशेष.