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दो बजकर चौदह मिनट

Anika kashyap
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction
Language: Hindi
Price: ₹316 + shipping
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Description

दो बजकर चौदह मिनट
लेखिका: अनिका कश्यप
कुछ कहानियाँ मुलाक़ातों से नहीं, आवाज़ों से शुरू होती हैं। कुछ रिश्तों को किसी नाम की ज़रूरत नहीं होती, और कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में तब आते हैं, जब हम ख़ुद अपने भीतर जीने की वजह तलाश रहे होते हैं।
‘दो बजकर चौदह मिनट’ नील और तारा की ऐसी ही एक भावनात्मक कहानी है।
नील दूसरों को टूटने से बचाने के लिए रात भर एक हेल्पलाइन पर बैठता है, जबकि उसका अपना जीवन गहरे अकेलेपन में डूबा हुआ है। फिर एक रात, ठीक दो बजकर चौदह मिनट पर, एक फ़ोन कॉल उसकी ख़ामोश दुनिया में दस्तक देती है। दूसरी ओर है तारा, जिसकी आवाज़ में दर्द है, जिसके शब्दों में अनगिनत अनकही कहानियाँ हैं और जिसके जीवन के चारों ओर कुछ ऐसी दीवारें हैं, जिन्हें नील देख नहीं सकता।
हर रात होने वाली उनकी बातचीत धीरे-धीरे एक ऐसे रिश्ते में बदलने लगती है, जहाँ बिना चेहरा देखे भी किसी की उदासी पहचानी जा सकती है, बिना हाथ थामे भी किसी को सहारा दिया जा सकता है और बिना कोई वादा किए भी किसी के इंतज़ार की वजह बना जा सकता है।
लेकिन तारा की ख़ामोशी के पीछे एक ऐसा सच छिपा है, जो नील की उम्मीदों को बदल सकता है। क्या दो अनजान आवाज़ें एक-दूसरे को उस अँधेरे से बाहर निकाल पाएँगी, जिसमें वे ख़ुद वर्षों से भटक रही हैं? या कुछ रिश्ते जीवन में केवल इसलिए आते हैं, ताकि उनके जाने के बाद हम प्रेम, पीड़ा और जीवन के अर्थ को नए सिरे से समझ सकें?
यह केवल प्रेम की कहानी नहीं है। यह अकेलेपन, टूटती उम्मीदों, अनकहे दर्द और उस छोटे-से सहारे की कहानी है, जो किसी के लिए पूरी दुनिया बन सकता है।
कभी-कभी किसी को बचाने के लिए बड़े वादों की नहीं, बस एक आवाज़ की ज़रूरत होती है, जो कह सके, “मैं सुन रहा हूँ।”
शायद इसी वजह से रात के दो बजकर चौदह मिनट, नील के लिए केवल घड़ी का समय नहीं रह जाते। वे उसके जीवन का सबसे अनमोल इंतज़ार बन जाते हैं।

About the Author

अनिका कश्यप हिंदी साहित्य की एक संवेदनशील लेखिका हैं, जिनकी रचनाओं में मानवीय भावनाओं, मौन, प्रेम, विरह और जीवन की अनकही पीड़ाओं को शब्द देने का प्रयास दिखाई देता है। उनका मानना है कि कुछ एहसास ऐसे होते हैं, जिन्हें कह पाना आसान नहीं होता, लेकिन साहित्य उन्हें महसूस करने की भाषा दे सकता है।
उनकी कहानियाँ उन रिश्तों की गहराइयों को छूने का प्रयास करती हैं, जो हमेशा शब्दों में व्यक्त नहीं होते, और उन भावनाओं को स्वर देती हैं, जिन्हें अक्सर मनुष्य अपने भीतर ही समेटे रहता है।
‘दो बजकर चौदह मिनट’ के माध्यम से अनिका ने अकेलेपन, उम्मीद, भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय संवेदनाओं की एक ऐसी दुनिया रचने का प्रयास किया है, जहाँ कभी-कभी किसी अनजान आवाज़ का साथ भी जीवन में गहरा अर्थ भर सकता है।
उनके लिए लेखन केवल कहानी कहना नहीं, बल्कि उन एहसासों तक पहुँचना है, जिन्हें पढ़ते हुए पाठक कहीं न कहीं अपने जीवन, अपनी स्मृतियों और अपने अनकहे शब्दों की झलक पा सके।

Book Details

Number of Pages: 93
Dimensions: A4
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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