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पुस्तक परिचय
सरिता सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि उस लड़की की कहानी है जिसने अपनी पूरी ज़िंदगी दूसरों की खुशियों और उम्मीदों के बीच कहीं पीछे छोड़ दी।
सरिता एक ऐसे परिवार में पली-बढ़ी जहाँ प्यार था, लेकिन अपनी जिंदगी के फैसले लेने की आज़ादी नहीं थी। दिल्ली में उसकी मुलाकात सागर से होती है—एक ऐसे लेखक से, जो उसकी कही हुई बातों से ज्यादा उसकी खामोशी को पढ़ लेता है। धीरे-धीरे दोनों के बीच ऐसा प्रेम जन्म लेता है जिसे किसी नाम या वादे की जरूरत नहीं थी।
लेकिन जब परिवार और प्रेम के बीच चुनाव करने का समय आता है, सरिता अपने प्यार को छोड़ने का फैसला करती है। वह सागर से झूठ बोलती है, ताकि वह उससे नफरत कर सके और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाए।
सरिता की शादी हो जाती है। एक नई हवेली, नए रिश्ते और जिम्मेदारियों के बीच उसका अपना अस्तित्व धीरे-धीरे खोने लगता है। मगर उसके हाथ में पहनी एक छोटी-सी चाँदी की अंगूठी उसे उस प्रेम की याद दिलाती रहती है जिसे उसने खुद अपने हाथों से खो दिया था।
यह कहानी सिर्फ सरिता और सागर की नहीं है। यह उन सभी लोगों की कहानी है जिन्होंने कभी परिवार के लिए अपनी इच्छा छोड़ी, प्रेम के लिए खुद को रोका, या किसी को बचाने के लिए उससे दूर हो गए।
कभी-कभी प्रेम को पाने से ज्यादा कठिन होता है—उसे छोड़ देना।
और कभी-कभी इंसान चला जाता है, लेकिन उसकी कहानी किसी की पूरी जिंदगी बनकर रह जाती है।
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