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ढ़ाई अक्षर मोक्ष का : कबीर संग एक यात्रा - असत्य से सत्य तक

Anil Jain
Type: Print Book
Genre: Philosophy, Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹363 + shipping
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Description

क्या आप वाकई जाग रहे हैं, या यह सिर्फ़ एक गहरी नींद का भ्रम है?
रोज़ सुबह उठना, दफ़्तर जाना, पैसे कमाना, सुख-सुविधाएँ जुटाना और अपनी सफलताओं पर गर्व करना - क्या यही जीवन का अंतिम सत्य है? या हम सब कबीर के शब्दों में उस “बौराने वाले जग” का हिस्सा हैं, जो नश्वर को शाश्वत मानकर माया के बाज़ार में स्वयं को धोखे में रखे हुए हैं?
‘ढ़ाई आखर मोक्ष का’ संत कबीर दास जी की कालजयी चेतना और आधुनिक मानव-जीवन के अंतर्विरोधों के बीच एक बेहद तीखा, तर्कसंगत और चिंतनशील संवाद है। यह पुस्तक पारंपरिक आध्यात्मिक उपदेशों जैसी नीरस नहीं है, बल्कि एक आत्मान्वेषी यात्रा है जो आपकी मान्यताओं पर सीधे सवाल खड़े करती है।
इस पुस्तक में आप क्या खोजेंगे?
-ज्ञान या अज्ञान? जिसे हम अपनी डिग्री, ज्ञान और वैज्ञानिक प्रगति समझते हैं, वह परम सत्य के आगे कितना तुच्छ है।
-अहंकार का बंधन: धन, रूप, पद और स्वाभिमान के पीछे छुपा वह 'मैं', जो हमारे पतन का कारण बनता है।
-माया की वास्तविकता: संसार के कागज़ की गुड़िया होने का अर्थ और इच्छाओं के अंतहीन चक्रव्यूह का विश्लेषण।
-जागरूकता से साक्षात्कार: अपनी आदतों की बेहोशी (Automatic Life) से बाहर निकलकर वर्तमान क्षण में वास्तविक रूप से जीने का सूत्र।
-संगति और गुरु का मर्म: आंतरिक यात्रा में कौन से बंधन रुकावट हैं और वास्तविक गुरु की क्या भूमिका है।
यह पुस्तक किसके लिए है?
-जो जीवन की तेज़ भागदौड़ के बीच ठहराव और मानसिक शांति की तलाश में हैं।
-जो कबीर के दोहों को केवल लोक-संगीत या कविता न मानकर उनके गहरे आध्यात्मिक अर्थ को समझना चाहते हैं।
-जो आत्म-साक्षात्कार, ध्यान और माया के बंधनों से मुक्ति (मोक्ष) के मार्ग पर चिंतनशील हैं।
संत कबीर के विचारों को केंद्र में रखकर लिखी गई यह कृति आपके मन के अहंकार को झकझोरने और जीवन को देखने का एक सर्वथा नया दृष्टिकोण देने का सामर्थ्य रखती है।
पढ़िए और स्वयं से पूछिए—क्या आप सचमुच जाग रहे हैं?

About the Author

अनिल जैन एक लेखक और विचारक हैं जो मानव चेतना, धारणा और जीवन के आंतरिक तंत्र की खोज करते हैं। अपनी पिछली कृतियों, Mind The Movement और माया, एक भव्य कल्पना के माध्यम से, वह इस बात पर गहन और परिवर्तनकारी विचार प्रस्तुत करते हैं कि हम अपनी वास्तविकता का निर्माण कैसे करते हैं और स्वयं को कैसे समझते हैं। उनका लेखन कालातीत दार्शनिक ज्ञान को दैनिक जीवन के अनुभवों के साथ जोड़ता है, और पाठकों को अपनी मानसिक धारणाओं से परे जाकर मन की परतों को टटोलने के लिए प्रेरित करता है।

Book Details

Number of Pages: 148
Dimensions: 6.00"x9.00"
Interior Pages: B&W
Binding: Hard Cover (Case Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

Ratings & Reviews

ढ़ाई अक्षर मोक्ष का : कबीर संग एक यात्रा - असत्य से सत्य तक

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