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शव-साधना एक मार्मिक और विचारोत्तेजक हिंदी कहानी है, जो शोक, समाज, सत्ता और सार्वजनिक विवेक के जटिल संबंधों को सामने लाती है। एक बच्ची के घर न लौटने की घटना धीरे-धीरे एक परिवार के निजी दुःख से आगे बढ़कर जाति, पुलिस, राजनीति, महत्वाकांक्षा और सामाजिक नैतिकता का प्रश्न बन जाती है।
अनिलचंद्र ठाकुर अपनी करुण, तीखी और व्यंग्यपूर्ण दृष्टि से यह प्रश्न उठाते हैं कि पीड़ित के दुःख के साथ समाज वास्तव में क्या करता है—उसके साथ खड़ा होता है, या उसे अपने स्वार्थ और प्रयोजनों में बदल देता है। यह केवल एक घटना की कहानी नहीं, बल्कि हमारे सार्वजनिक विवेक की परीक्षा है।
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